सीहोर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया, सपा ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

सीहोर। जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम सारंगाखेड़ी में शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को लेकर बुधवार को प्रशासन ने कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस अमले की मौजूदगी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। हालांकि कार्रवाई के बाद मामला पूरी तरह शांत होने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। समाजवादी पार्टी की जिला अध्यक्ष इंदिरा भील ने प्रशासन की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि गरीबों के कच्चे मकान और दुकानें तोड़ दी गईं, जबकि रसूखदार लोगों के कथित अतिक्रमण अब भी कार्रवाई से बाहर हैं।
हाईवे बाईपास के पास सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत
ग्राम सारंगाखेड़ी में इंदौर-भोपाल हाईवे बाईपास के समीप शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा बांस-बल्ली और चद्दर आदि लगाकर निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की जानकारी मिलने के बाद राजस्व अमले ने मौके का निरीक्षण किया और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।
राजस्व अमले ने मौके पर पहुंचकर हटाया अतिक्रमण
एसडीएम तन्मय वर्मा के निर्देश तथा तहसीलदार डॉ. अमित सिंह के निर्देशन में नायब तहसीलदार धनजी मालवीय के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। राजस्व निरीक्षक धीरेंद्र वर्मा, सुरेंद्र जामलिया और आरती भिलाला सहित हल्का पटवारी नीलेश यादव, पटवारी शरद गुप्ता, विक्रम सिंह, भारत मेवाड़ा, कैलाश वर्मा, नीरज जोशी तथा नगर पालिका राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटवाया।
प्रशासन का दावा- शासकीय भूमि को कराया अतिक्रमण मुक्त
प्रशासन की ओर से बताया गया कि कार्रवाई के दौरान शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। कलेक्टर बालागुरू के. ने जिले में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।
समाजवादी पार्टी ने कार्रवाई को बताया आधा-अधूरा
इधर समाजवादी पार्टी की जिला अध्यक्ष इंदिरा भील ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गरीब तबके के लोगों के कच्चे मकान और दुकानें तोड़ दी गईं, जबकि शहर के कुछ रसूखदार लोगों के कथित अतिक्रमणों पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताते हुए विरोध जताया है।
पहले ज्ञापन, अब कार्रवाई के बाद फिर गरमाया मामला
इंदिरा भील के अनुसार इस मामले को लेकर उनके द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था। ज्ञापन में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अनधिकृत धनराशि लेकर कब्जे कराए जाने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद प्रशासन द्वारा मामले की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई और बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
रसूखदारों पर कार्रवाई का सवाल, कलेक्टर को देंगे ज्ञापन
कार्रवाई के बावजूद समाजवादी पार्टी ने इसे पूर्ण कार्रवाई नहीं माना है। इंदिरा भील का कहना है कि जब तक सभी कथित अतिक्रमणों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होती, तब तक सवाल बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में जल्द ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अब प्रशासन की कार्रवाई और लगाए गए आरोपों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष कथित अतिक्रमणों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।



















