सीहोर से 'महाकाल' तक 160 किमी की पदयात्रा शुरू, अच्छी बारिश और जनकल्याण की कामना लेकर निकले शिवभक्त

सीहोर। क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश, नई फसल की भरपूर पैदावार, गौसेवा, गांव और गरीब के कल्याण की मंगल कामना को लेकर निकाली जा रही महाकाल सेवा संकल्प पदयात्रा शुक्रवार को धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के वातावरण में प्रारंभ हो गई। लगातार चौथे वर्ष आयोजित हो रही यह सात दिवसीय पदयात्रा शहर के प्राचीन गणेश मंदिर से विधि-विधान और विशेष पूजन-अर्चन के साथ रवाना हुई। करीब 160 किलोमीटर की यह यात्रा विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचेगी, जहां सीवन और पार्वती नदी के जल सहित मार्ग में एकत्रित पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाएगा।
गणेश मंदिर से हुआ शुभारंभ, मंदिरों में हुआ पूजन-अर्चन
शुक्रवार सुबह शहर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक के साथ पदयात्रा का शुभारंभ किया गया। इसके बाद यात्रा शुगर फैक्ट्री माता मंदिर, त्यागी बाबा आश्रम, पंचमुखी हनुमान मंदिर, कालका मंदिर, छावनी स्थित श्री सिद्ध हनुमान मंदिर, चमत्कारेश्वर महादेव, पिपलेश्वर महादेव, मनकामेश्वर महादेव, गंगेश्वर महादेव और कुबेरेश्वर महादेव मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया। प्रत्येक पड़ाव पर शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जयघोष करते हुए क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की।
अनेक स्थानों पर हुआ श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत
यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के साथ जनप्रतिनिधियों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल, पंडित मोहितराम पाठक, सुरेश साबू, जितेंद्र तिवारी, सुदीप व्यास, हेमंत दरबार, आयुष सोनी, पवन राठौर, राजू बोयत, अजय पाल, नरेंद्र राजपूत, इरफान लाला, मुनव्वर मामू, अबरार सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने युवा समाजसेवी आशीष गहलोत, करणी सेना परिवार के जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह ठाकुर और पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
सात दिन में तय होगा 160 किलोमीटर का सफर
पदयात्रा का पहला पड़ाव जिला मुख्यालय के समीप चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर रहा। इसके बाद यात्रा कोठरी, आष्टा, जावर और देवास होते हुए उज्जैन पहुंचेगी। रास्ते में जताखेड़ा, अमलाहा सहित विभिन्न गांवों में श्रद्धालुओं का स्वागत एवं विश्राम की व्यवस्था की गई है। सात दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा प्रतिदिन निर्धारित पड़ावों पर रात्रि विश्राम करेगी।
महाकाल दरबार में होगा जलाभिषेक और ध्वजारोहण
समिति के अनुसार यात्रा का समापन उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा। यहां सीवन नदी, पार्वती नदी और यात्रा मार्ग में एकत्रित पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा ध्वजारोहण, सहस्त्रधारा महारुद्राभिषेक, महाआरती और प्रसादी वितरण जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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जनकल्याण और समृद्धि का संदेश दे रही पदयात्रा
युवा समाजसेवी आशीष गहलोत ने बताया कि पदयात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जनकल्याण, क्षेत्र में सुख-समृद्धि, किसानों की नई फसल की अच्छी पैदावार, पर्याप्त वर्षा, गौसेवा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना भी है। उन्होंने कहा कि लगातार चौथे वर्ष आयोजित हो रही इस यात्रा को हर वर्ष लोगों का व्यापक सहयोग और उत्साह मिल रहा है।
बड़ी संख्या में जुड़े शिवभक्त, पूरे मार्ग में गूंजे जयकारे
यात्रा में सीहोर शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। भगवान महाकाल और भोलेनाथ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु हाथों में ध्वज, डमरू और धार्मिक पताकाएं लेकर पूरे उत्साह के साथ पदयात्रा में आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह लोगों ने जल, फल और प्रसाद वितरण कर यात्रियों की सेवा की।
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समिति ने क्षेत्रवासियों से की सहभागिता की अपील
महाकाल सेवा संकल्प समिति और करणी सेना परिवार ने क्षेत्रवासियों से पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह यात्रा समाज में धार्मिक आस्था के साथ सेवा, एकता और जनकल्याण की भावना को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। लगातार चौथे वर्ष आयोजित यह संकल्प यात्रा अब सीहोर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में अपनी विशेष पहचान बना चुकी है।












