6 साल बाद सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा अद्भुत संयोग, इस दिन पूरी हो सकती हैं मनोकामनाएं, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, और इसी दिन पर सोम प्रदोष व्रत का खास संयोग बन रहा है। जानें सावन सोमवार और सोम प्रदोष का धार्मिक महत्व, शिव पूजा के शुभ मुहूर्त, रुद्राभिषेक का महत्व, महादेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय और इस दिन की पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं। साथ ही जानें यह संयोग 6 साल बाद क्यों खास है।
6 साल बाद सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा अद्भुत संयोग, इस दिन पूरी हो सकती हैं मनोकामनाएं, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, और इसी दिन पर सोम प्रदोष व्रत का खास संयोग बन रहा है।

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं और महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। खास बात यह है कि इस दिन सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का एक साथ आना बेहद शुभ माना जाता है।

6 साल बाद बन रहा खास संयोग

पंचांग के अनुसार 10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ त्रयोदशी तिथि का संयोग बन रहा है। सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहा जाता है। बताया जाता है कि इससे पहले ऐसा संयोग साल 2020 में बना था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूरी होने की कामना की जाती है।

प्रदोष काल में तांडव करते हैं महादेव

स्कंद पुराण में प्रदोष काल को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष बताया गया है। मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर देवताओं के बीच तांडव करते हैं। इसलिए इस समय शिव पूजा, मंत्र जाप और अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है।

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सावन सोमवार पूजा का शुभ मुहूर्त

  • सुबह 5:47 बजे से 7:27 बजे तक
  • सुबह 9:07 बजे से 10:47 बजे तक

सोम प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

  • रात 7:05 बजे से 9:14 बजे तक

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें। भगवान शिव को धतूरा और आक के फूल भी चढ़ाए जाते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें। प्रदोष काल में भी शिवलिंग का अभिषेक करके दीपक जलाएं और महादेव की आरती करें।

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शिव पूजा से क्या लाभ मिलने की मान्यता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ संयोग में भगवान शिव की पूजा करने से विवाह में आ रही रुकावट दूर होने और योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी हो सकती है। दांपत्य जीवन में सुख-शांति और प्रेम संबंधों में चल रही परेशानियां दूर होने की भी मान्यता है। इसके अलावा संतान सुख, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के लिए भी इस दिन शिव पूजा की जाती है। आर्थिक परेशानी, कर्ज और मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए भी भक्त महादेव की आराधना करते हैं। घर में मंत्र जाप और पूजा करने से परिवार के बीच चल रहे विवाद दूर होने और सुख-शांति आने की धार्मिक मान्यता है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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