विमान किराये से जुड़ी याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दो हफ्ते में नियम प्रस्तुत करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियम दो हफ्ते के अंदर उसके समक्ष प्रस्तुत करे। इस अधिनियम का मकसद भारत के विमानन क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दो हफ्ते में नियम प्रस्तुत करने को कहा
फाइल फोटो

नई दिल्ली। विमान किराये में लगातार हो रही बढ़ोतरी और यात्रियों से वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्कों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक हफ्ते के भीतर नए नियम प्रस्तुत करने को कहा है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि तैयार किए गए नियम सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश किए जाएं, चाहे उन्हें संसद के दोनों सदनों में रखा गया हो या नहीं। अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए स्वतंत्र और प्रभावी नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए उठी स्वतंत्र नियामक की मांग 

याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइन कंपनियां बिना किसी प्रभावी निगरानी के हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्कों में मनमानी बढ़ोतरी कर रही हैं। इससे यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र नियामक संस्था बनाई जाए, जो किरायों और अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करने तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की शक्ति रखे।

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केंद्र ने बताया- नियमों का मसौदा तैयार, अनुवाद जारी 

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि नए नियमों का मसौदा तैयार हो चुका है और फिलहाल उसका अनुवाद किया जा रहा है। इसके बाद इन्हें संसद के समक्ष पेश किया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम संसद में पेश हुए हों या नहीं, उन्हें एक हफ्ते के भीतर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुराने नियम प्रभावी रहेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को तय की है।

अत्यधिक किराये पर पहले भी चिंता जता चुका है सुप्रीम कोर्ट 

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने 'अत्यधिक विमान किराये' का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसका स्थायी समाधान केवल एक स्वतंत्र और प्रभावी नियामक व्यवस्था ही हो सकती है। इससे पहले 15 मई को भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि हवाई किरायों को तर्कसंगत बनाया जाए ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। उस समय केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 से लागू हो चुका है और उससे संबंधित नियम तैयार किए जा रहे हैं।

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चेक-इन बैगेज सीमा घटाने पर भी याचिका में सवाल 

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि अधिकांश निजी एयरलाइन कंपनियों ने बिना किसी ठोस कारण के इकोनॉमी श्रेणी के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है। इसके अलावा, वर्तमान व्यवस्था में ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं है जिसके पास हवाई किरायों या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करने अथवा उनकी अधिकतम सीमा तय करने का अधिकार हो। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति में यात्रियों के हित प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्र नियामक की स्थापना समय की जरूरत बन गई है।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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