स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर भड़की जंग :बंदर अब्बास और केशम में दिन में दूसरी बार हमले, अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव सोमवार को और गंभीर हो गया। ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र बंदर अब्बास और केशम (Qeshm) द्वीप के आसपास एक ही दिन में दूसरी बार धमाकों की खबर सामने आई है। एक सरकारी न्यूज एजेंसी के अनुसार दोनों रणनीतिक क्षेत्रों में दोबारा हमले किए गए, हालांकि इन हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी जारी नहीं की गई है।
सुबह भी बने थे ईरानी बंदरगाह निशाना
इससे पहले सोमवार सुबह ईरान की एक मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया था कि दुश्मन की मिसाइलों ने माहशहर, जस्क, सिरिक, बंदर अब्बास और केशम समेत कई तटीय इलाकों को निशाना बनाया। दिन में सामने आई दूसरी हमले की सूचना के बाद यह माना जा रहा है कि ईरान के दक्षिणी समुद्री तट पर सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। हालांकि किसी भी पक्ष ने ताजा हमलों की विस्तृत सैन्य जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। एक और अन्य न्यूज एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर केंद्रित रही है। एजेंसी के अनुसार इन हमलों में कई मछुआरों और ईरानी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत हुई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है, लेकिन ईरानी मीडिया लगातार इसे अमेरिका की आक्रामक कार्रवाई बता रहा है।
एक रिपोर्ट का दावा- कई अमेरिकी ठिकानों पर किया जवाबी हमला
ईरान की एक रिपोर्ट ने तीन अलग-अलग बयान जारी कर दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के मुताबिक यह अभियान होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक टकराव और ईरानी तटीय ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में चलाया गया। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस में मौजूद ईंधन भंडारण केंद्रों और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया गया। दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस सेंटर, P-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमला किया गया। इसके अलावा ईरान ने ओमान, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई का दावा किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव की सबसे बड़ी वजह
मौजूदा संघर्ष की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर बढ़ा विवाद माना जा रहा है। सोमवार को अमेरिका और ईरान दोनों ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ होने का दावा किया। यह वही जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।
कंटेनर जहाज पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
रविवार को ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई। युद्ध शुरू होने के बाद से ही इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों का मार्ग बदलने या संचालन सीमित करने पर मजबूर हुई हैं।
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कूटनीतिक प्रयासों पर भी संकट के बादल
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के अंतरिम समझौते के तहत स्थायी समाधान के लिए बातचीत की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने उन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो यह संघर्ष एक बार फिर व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।












