सीहोर:किसानों ने किया भोपाल में बिजली मंडल मुख्यालय का घेराव, करंट की चपेट में आने से 3 ग्रामीणों की हो चुकी है मौत

सीहोर। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा खेत पर कृषि कार्य करते समय झूल रही 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आ गए थे। हादसा इतना गंभीर था कि उनका एक हाथ काटना पड़ा। किसानों का आरोप है कि यह दुर्घटना पूरी तरह विद्युत मंडल की लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि गांव में जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें लंबे समय से हादसों को न्योता दे रही हैं।
पांच किसान करंट की चपेट में आए
किसानों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में केवल ग्राम बड़वेली में ही पांच किसान करंट की चपेट में आए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो इन दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता था।
बिजनौर को सीएम योगी ने दी सौगात: कांग्रेस पर जमकर बरसे मुख्यमंत्री, बोले-तुष्टिकरण नहीं विकास चाहिए
बार-बार शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि झूलते तारों, जर्जर खंभों और खराब बिजली व्यवस्था की शिकायतें कई बार विद्युत मंडल के अधिकारियों को दी गईं, लेकिन किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। किसान प्रेम सिंह मेवाड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री निवास, ऊर्जा मंत्री, कलेक्टर कार्यालय और विभागीय अधिकारियों को कई ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
मंत्रियों के निर्देशों का भी नहीं हुआ पालन
किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री निवास से अधीक्षण यंत्री विद्युत मंडल सीहोर को निर्देश दिए गए थे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी एमडी ऋषि गर्ग को दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित किसानों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने भी लिखित निर्देश जारी किए, लेकिन इन आदेशों का अब तक पालन नहीं किया गया।
एमडी ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
करीब तीन घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग ने किसानों से मुलाकात की और उनका ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और पीड़ित किसान को नियमों के अनुसार राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने अपना धरना खत्म किया।
मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग पहुंचे किसान
धरना समाप्त होने के बाद समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ए.पी. सिंह और महिला आयोग में भी ज्ञापन सौंपा। महिला आयोग के सचिव ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए बैठक कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया। साथ ही पीड़ित किसान के परिवार, उनकी पत्नी और छोटे बच्चों को न्याय दिलाने का आश्वासन भी दिया।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर पीड़ित किसान को न्याय, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, 25 लाख रुपये का मुआवजा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन जिले के किसान गांव-गांव चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक करेंगे और राजधानी भोपाल में बड़ा आंदोलन कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रखेंगे।
Edited By: Rohit Sharma












