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भोपाल में 700 छात्रों की प्यास : गुरु का ठेला,  मुन्ना की दुकान और ललित होटल यही है सरकारी स्कूल के बच्चों के ‘पानी पीने के ठिकाने’

राजधानी भोपाल के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में पीने का पानी नहीं मिलने से बच्चे आसपास की होटलों पर पानी पीने को मजबूर हैं। स्कूल के बच्चों ने साफ पानी की व्यवस्था के लिए प्राचार्य को एक चिट्ठी भी लिखी है। बच्चों ने प्राचार्य को बताया कि स्कूल का पानी पीने लायक नहीं है।
गुरु का ठेला,  मुन्ना की दुकान और ललित होटल यही है सरकारी स्कूल के बच्चों के ‘पानी पीने के ठिकाने’
भोपाल। सेमरा कलां सरकारी स्कूल में छात्रों को मिलता है ऐसा गंदा पानी।

भोपाल। सरकारी स्कूलों में बच्चे जब प्राचार्य को आवेदन करते हैं तो उसमें अक्सर छुट्टी, खेल या पढ़ाई से जुड़ी बातें ही होती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर राजधानी के एक सरकारी स्कूल के छात्रों का प्रिंसिपल को लिखा पत्र वायरल हो रहा है। पत्र में छात्रों को पानी पीने के लिए ‘मुन्ना के ठेले’ तक जाने की मजबूरी बताई है। मामला भोपाल के सेमरा कलां स्थित शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से संबंधित है। वायरल पत्र में स्कूल के करीब 700 छात्रों ने अपनी प्यास की कहानी लिख दी। बच्चों ने शिकायत की कि स्कूल में नलों से गंदा पानी आ रहा है, जिसे पीना संभव नहीं है। इसलिए प्यास लगने पर उन्हें स्कूल से बाहर निकलकर मुन्ना के ठेले, गुरु के समोसे की दुकान और ललित होटल तक जाना पड़ता है।

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पानी पीने के लिए हर दिन उठाते हैं रिस्क

आवेदन में छात्रों ने साफ लिखा है कि स्कूल समय में परिसर से बाहर जाना नियमों के खिलाफ है, लेकिन स्वच्छ पानी नहीं मिलने के कारण उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। उन्होंने यह भी लिखा कि सड़क पार कर पानी लेने जाना हर दिन जोखिम भरा होता है। यदि इस दौरान कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी।

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पहले भी जानकारी दी, लेकिन समाधान नहीं

पत्र में बच्चों ने यह भी बताया कि गंदे पानी की समस्या से वे लंबे समय से परेशान हैं और इसकी जानकारी पहले भी मौखिक रूप से प्राचार्य को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। मजबूरी में उन्हें लिखित आवेदन देना पड़ा। यह आवेदन केवल गंदे पानी की शिकायत नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्थाओं पर कटाक्ष है। एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं करने के दावे करती है, वहीं राजधानी के स्कूल में बच्चों को पीने का साफ पानी नहीं मिलता। ऐसे में बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए स्कूल की सीमा से बाहर तक जाना पड़ता है। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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