बैतूल के दिव्यांग तैराक रामबरन पाल ने फतह किया इंग्लिश चैनल! 21 घंटे 20 मिनट तक तैरकर पहुंचे फ्रांस

देवेश दुबे बैतूल।
मध्य प्रदेश के बैतूल के दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय तैराक रामबरन पाल ने अपनी मेहनत और हौसले से एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित रामबरन पाल ने इंग्लिश चैनल पार कर इतिहास रच दिया। उन्होंने इंग्लैंड के डोवर से फ्रांस तक करीब 21 घंटे 20 मिनट लगातार तैराकी की और इस चुनौतीपूर्ण सफर को सफलतापूर्वक पूरा किया। रामबरन पाल ने 24 सितंबर की सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर इंग्लैंड के डोवर से अपनी तैराकी शुरू की। इसके बाद लगातार समुद्र में तैरते हुए उन्होंने 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर फ्रांस पहुंचकर अपना अभियान पूरा किया। ठंडे समुद्र में इतने लंबे समय तक तैरना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, लेकिन रामबरन ने हिम्मत नहीं छोड़ी।
ठंडे समुद्र और मुश्किल हालात के बीच कायम रहा हौसला
इंग्लिश चैनल को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री तैराकी मार्गों में गिना जाता है। यहां तैराकों को ठंडे पानी, तेज लहरों और लंबे समय तक लगातार तैरने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।रामबरन पाल ने भी इस चुनौती का सामना किया। कई घंटों तक समुद्र में रहने के बावजूद उन्होंने अपनी गति और हौसला बनाए रखा। उनके लिए यह सिर्फ एक तैराकी अभियान नहीं था, बल्कि लंबे समय की मेहनत और तैयारी का परिणाम था। रामबरन की इस सफलता को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले साल खराब मौसम के कारण उनका इंग्लिश चैनल पार करने का प्रयास शुरू ही नहीं हो पाया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा तैयारी की और इस बार चुनौती को पूरा करके दिखाया।

डॉ. सतेन्द्र सिंह लोहिया के साथ पूरा किया अभियान
रामबरन पाल ने यह ऐतिहासिक अभियान पद्मश्री और अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक डॉ. सतेन्द्र सिंह लोहिया के साथ पूरा किया। इस अभियान में भिंड के गजेंद्र सिंह कुशवाह भी जुड़े रहे। डॉ. सतेन्द्र सिंह लोहिया के लिए भी यह उपलब्धि खास रही। उन्होंने अपनी तीसरी इंग्लिश चैनल क्रॉसिंग पूरी की। वहीं रामबरन पाल के लिए यह उपलब्धि उनके खेल करियर के सबसे यादगार अध्यायों में शामिल हो गई है।
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रामबरन के नाम 22 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक
रामबरन पाल लंबे समय से तैराकी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 22 पदक जीते हैं। उनकी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें वर्ष 2006 में मध्य प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उनकी उपलब्धियां सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं हैं। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने तैराकी में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार नई चुनौतियों को स्वीकार किया।

अब बैतूल में दे रहे हैं तैराकों को प्रशिक्षण
रामबरन पाल वर्तमान में बैतूल नगर पालिका के स्विमिंग पूल में कोच के तौर पर काम कर रहे हैं। यहां वे दूसरे तैराकों को प्रशिक्षण देते हैं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करते हैं। खुद एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौती पार करने के बाद रामबरन का अनुभव युवा और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का काम कर सकता है।
दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए दिया बड़ा संदेश
रामबरन पाल की इंग्लिश चैनल फतह सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं है। यह उन खिलाड़ियों के लिए भी एक संदेश है जो किसी शारीरिक चुनौती के कारण अपने सपनों को लेकर हिचकिचाते हैं। 21 घंटे 20 मिनट तक ठंडे समुद्र में तैरकर फ्रांस पहुंचना उनकी मेहनत, तैयारी और मजबूत इच्छाशक्ति को दिखाता है। बैतूल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि हासिल करना मध्य प्रदेश के लिए भी गौरव की बात है।



















