आष्टा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर के ‘वोट खरीदने’ के बयान से सियासी भूचाल, कांग्रेस बोली- यही है 'वोट चारी', लोकतंत्र का चीरहरण!

सीहोर। जिले की आष्टा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर का एक कथित वायरल वीडियो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में विधायक अपने जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कथित तौर पर 18 में से 10 सदस्यों को खरीदने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
मंच से किया खुलासा, अब उठ रहे सवाल
राजीव गुजराती का भाजपा पर तीखा हमला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने विधायक के कथित बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आष्टा विधायक 10 वोट खरीदकर जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। गुजराती ने इसे लोकतंत्र का चीरहरण करार देते हुए कहा कि भाजपा अर्थ और पावर के दम पर वोट चोरी और सीनाजोरी कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान ने जिले की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने इस प्रकरण को केवल एक विधायक के बयान तक सीमित नहीं रखते हुए भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, सदस्य खरीदने संबंधी आरोपों को स्वतंत्र साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर ही अंतिम रूप से स्थापित किया जा सकता है।
'शिवराज सिंह चौहान के जिले में यह हाल'
राजीव गुजराती ने अपने हमले को और धार देते हुए कहा कि जब शिवराज सिंह चौहान के जिले में इस तरह के हालात हैं, तो प्रदेश के दूसरे जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने भाजपा के राजनीतिक प्रभाव और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की कोशिश की है। कांग्रेस का आरोप है कि धनबल और सत्ताबल का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। पार्टी ने विधायक के कथित बयान को इसी संदर्भ में उठाते हुए भाजपा को घेरने का प्रयास किया है। अब राजनीतिक निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा संगठन और विधायक इस विवाद पर क्या सफाई देते हैं।
पहले जिला पंचायत अध्यक्ष, फिर बने विधायक
गोपाल सिंह इंजीनियर पहले जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। बाद में विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनने के बाद उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। अब उनके पुराने राजनीतिक कार्यकाल से जुड़ा कथित वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पद पर निर्वाचन की प्रक्रिया में सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी जनप्रतिनिधि के बयान में सदस्यों की खरीद-फरोख्त का उल्लेख हो, तो उसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन किसी कथित बयान को कानूनी रूप से प्रमाणित तथ्य मानने से पहले उसके मूल वीडियो, पूरे संदर्भ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
भाजपा की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा संगठन विधायक के कथित बयान पर क्या रुख अपनाता है और गोपाल सिंह इंजीनियर वायरल वीडियो को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। क्या पार्टी इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी या कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज करेगी-यह देखना बाकी है।
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