ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सामने आई नई रिपोर्ट्स में बड़ा खुलासा हुआ है। इन हमलों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना का अत्याधुनिक E-3 Sentry (AWACS) विमान नष्ट हो गया है। अब जारी हुई तस्वीरों और वीडियो से इस नुकसान की पुष्टि भी हो गई है। बताया जा रहा है कि यह विमान अमेरिकी वायुसेना के 552nd Air Control Wing का E-3G मॉडल था, जो ओक्लाहोमा स्थित टिंकर एयर फोर्स बेस से ऑपरेट करता था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में विमान के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी टेल सेक्शन (पिछला भाग) को निशाना बनाया गया। इसी हिस्से में विमान का बड़ा रडार डोम लगा होता है, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होता है।
हालांकि विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर मतभेद है कि हमला ड्रोन से किया गया या बैलिस्टिक मिसाइल से, लेकिन इतना साफ है कि हमला बेहद सटीक और योजनाबद्ध था।
E-3 AWACS अमेरिकी वायुसेना के सबसे महंगे और रणनीतिक विमानों में से एक है। इसकी कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर बताई जाती है। इसकी तुलना केवल अमेरिकी कमांड और कंट्रोल विमान E-4B Nightwatch से की जाती है। इसलिए इस विमान का नष्ट होना अमेरिका के लिए बड़ा सैन्य और आर्थिक झटका माना जा रहा है।
इस युद्ध के दौरान ईरान पहले भी अमेरिकी सैन्य सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले ईरान ने कतर में स्थित लगभग 1.1 बिलियन डॉलर कीमत वाले AN/FPS-132 रडार और दो AN/TPY-2 रडार सिस्टम भी नष्ट किए थे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि E-3 AWACS विमान का नष्ट होना अब तक का सबसे बड़ा नुकसान है।
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यह हमला 28 मार्च को हुआ। यह अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर शुरू किए गए हवाई हमलों के ठीक एक महीने बाद हुआ है। इस दौरान ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है। इन हमलों की वजह से अमेरिका और उसके सहयोगियों की मिसाइल इंटरसेप्शन क्षमता पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे रडार सिस्टम का नष्ट होना और इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी प्रमुख कारण हैं।
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हमले में केवल AWACS विमान ही नहीं, बल्कि अमेरिकी वायुसेना के कम से कम तीन KC-135 Stratotanker (एयर रिफ्यूलिंग विमान) भी नष्ट हो गए। इनमें से प्रत्येक विमान की कीमत लगभग 53 मिलियन डॉलर बताई जाती है। इस हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत होने की भी खबर है। इससे पहले मार्च के दूसरे सप्ताह में भी ईरान के हमले में पांच KC-135 विमान क्षतिग्रस्त हुए थे। वहीं इराक में भी एक KC-135 विमान नष्ट और एक अन्य क्षतिग्रस्त हुआ था।
लगातार हो रहे हमलों की वजह से अमेरिकी वायुसेना के रिफ्यूलिंग बेड़े पर भारी दबाव पड़ रहा है। अब उन्हें अपने ऑपरेशन दूर-दराज के एयरबेस से संचालित करने पड़ रहे हैं, जिसके लिए ज्यादा टैंकर विमानों की जरूरत होती है।
वहीं KC-135 टैंकर बेड़े की उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है, जिससे उनकी मेंटेनेंस की जरूरत भी बढ़ गई है। दूसरी ओर नए KC-46 टैंकर विमानों की संख्या अभी सीमित है। इन सभी कारणों से मध्य एशिया क्षेत्र में अमेरिकी वायुसेना की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है।