वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन प्रदर्शनों को ‘No Kings Protest’ नाम दिया गया है। यह इस आंदोलन का तीसरा दौर है, जिसमें लाखों लोग सड़कों पर उतरकर ट्रंप सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अमेरिका को राजा की सत्ता नहीं बनने देना चाहते। उनका आरोप है कि ट्रंप की नीतियां लोकतंत्र के खिलाफ हैं और आम लोगों पर असर डाल रही हैं।
इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम मुद्दा ईरान के साथ बढ़ता तनाव और युद्ध की स्थिति है। इसके अलावा, अप्रवासियों (इमिग्रेंट्स) के खिलाफ सख्त कानून और देश में बढ़ती महंगाई भी लोगों के गुस्से की वजह बनी हुई है।
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एक प्रदर्शनकारी ने साफ कहा अमेरिका में ताकत जनता के पास है, न कि किसी ऐसे नेता के पास जो खुद को राजा समझता हो।

शनिवार को न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस समेत लगभग सभी बड़े शहरों में प्रदर्शन हुए। वॉशिंगटन डीसी में हालात सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। Lincoln Memorial और National Mall के आसपास हजारों लोगों की भीड़ जुटी। लोग हाथों में पोस्टर, बैनर और नारे लेकर मार्च करते नजर आए।

आयोजकों का दावा है कि इस बार यह आंदोलन पहले से भी बड़ा है। पिछले साल जून में करीब 50 लाख लोग जुड़े थे, अक्टूबर में यह संख्या 70 लाख तक पहुंची। इस बार 90 लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,000 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं।
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हालांकि ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Los Angeles में स्थिति थोड़ी बिगड़ गई। यहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और बोतलें फेंकीं। इसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
इस बार प्रदर्शन में कुछ अलग और अनोखे तरीके भी देखने को मिले। कुछ लोग अजीब कपड़े पहनकर आए, जिन पर LICE लिखा था। यह दरअसल अमेरिकी एजेंसी ICE (Immigration and Customs Enforcement) का मजाक उड़ाने का तरीका था। लोगों ने ढोल-नगाड़े बजाए, घंटियां बजाईं और जोर-जोर से नारे लगाए- नो किंग्स, नो रूलर!

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Abigail Jackson ने इन प्रदर्शनों को वामपंथी ताकतों द्वारा फैलाया गया पागलपन बताया। वहीं, National Republican Congressional Committee ने भी इन रैलियों की आलोचना की। उनका कहना है कि ये प्रदर्शन अमेरिका विरोधी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं।