जबलपुर। सरवर गांव की इस जमीन को लेकर विवाद अभी सुलझने से दूर है। कोर्ट के दखल के बाद फिलहाल स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी रहेगी।
इस जमीन को लेकर तीन पक्षों के बीच विवाद जारी है, जिसमें किसान, कंपनी और खरीदार शामिल हैं। किसानों का कहना है कि वे वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं और उनका कब्जा वैध है। दूसरी ओर मैकडॉवेल स्पिरिट्स लिमिटेड (अब यूनाइटेड स्पिरिट्स) का भी इस जमीन से जुड़ा दावा सामने आया है। वहीं, हर्ष पैकेजिंग ने खुद को वैध खरीदार बताया है। तीनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और तर्क पेश कर रहे हैं। इस वजह से मामला और ज्यादा जटिल हो गया है। कोर्ट में इसी को लेकर सुनवाई जारी है।
ये भी पढ़ें: कूनो नेशनल पार्क से फिर खुशखबरी : मादा चीता गामिनी ने 4 शावकों को दिया जन्म, CM मोहन यादव ने दी बधाई
किसान सोमेश्वर प्रसाद चक्रधारी, मोहम्मद कासिम और सैमसन डिसूजा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। उनका कहना है कि मूल मालिक कैलाश बाजपेयी ने 1999 में उन्हें 16 एकड़ जमीन खेती के लिए दी थी। तब से वे लगातार इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। बाकी 4 एकड़ पर विटारी डिस्टिलरीज लिमिटेड द्वारा डिस्टिलरी स्थापित की गई थी। बाद में 2001 में इस कंपनी का विलय मैकडॉवेल स्पिरिट्स में हो गया। किसानों का आरोप है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में उन्हें न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का मौका मिला। इसी कारण उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
ये भी पढ़ें: Windfall Tax : मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच केंद्र का बड़ा फैसला, ATF और डीजल एक्सपोर्ट के दामों में भारी बढ़ोतरी की
सुनवाई के दौरान किसानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर, अनुराग गोहिल और भूपेश तिवारी ने दलीलें रखीं। कोर्ट ने पाया कि हर्ष पैकेजिंग को कई मौके दिए गए, लेकिन उसने मालिकाना हक के जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए। इस पर डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने फिलहाल जमीन की स्थिति यथावत रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 24 जून को तय की गई है। इससे साफ है कि अभी यह विवाद लंबा चल सकता है।