राज्यसभा में महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। जहां सरकार संवाद और सहयोग की बात कर रही है, वहीं विपक्ष सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। इस टकराव ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरमाने वाला है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार संवाद चाहती है, लेकिन विपक्ष सहयोग नहीं कर रहा। उन्होंने बताया कि कई बार बैठक के लिए बुलाया गया, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। रिजिजू ने कहा कि सरकार विपक्ष को सम्मान देती है, जबकि पहले की सरकारों में ऐसा नहीं होता था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगे रहते हैं।
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रिजिजू की बातों पर संजय सिंह ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि सरकार खुद राजनीति कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार गंभीर होती तो महिला आरक्षण बिल इसी सत्र में लाया जाता। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि जनता के हित में। उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा और बढ़ गया।
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इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को घेरा। मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश और मनोज कुमार झा ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक इस पर कोई काम नहीं किया। और अब चुनाव के समय इस मुद्दे को उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय को भी राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।