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डॉ. हरिसिंह गौर के सपनों को लेकर भावुक हुए अभिषेक भार्गव, पूछा- क्या बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को मिल रहा है विश्वविद्यालय का पूरा लाभ?

सागर विश्वविद्यालय को लेकर भाजपा नेता अभिषेक भार्गव ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘हम अपराधी हैं डॉ. गौर साहब के।’ उन्होंने बुंदेलखंड के विद्यार्थियों की भागीदारी और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्य पर सवाल उठाए।
डॉ. हरिसिंह गौर के सपनों को लेकर भावुक हुए अभिषेक भार्गव

मध्यप्रदेश के सागर में स्थित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय को लेकर भाजपा नेता अभिषेक भार्गव की एक पोस्ट चर्चा में है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘हम अपराधी हैं डॉ. गौर साहब के।’ उनकी इस टिप्पणी ने विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्य, बुंदेलखंड के विद्यार्थियों की भागीदारी और स्थानीय लोगों के जुड़ाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।अभिषेक भार्गव का कहना है कि डॉ. हरिसिंह गौर ने अपनी संपत्ति लगाकर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, ताकि क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज विश्वविद्यालय अपने संस्थापक के सपनों को उसी तरह पूरा कर पा रहा है?

केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद स्थानीय विद्यार्थियों पर उठाए सवाल

अभिषेक भार्गव ने अपनी पोस्ट में पुराने सागर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि पहले बुंदेलखंड के हजारों विद्यार्थी यहां पढ़ाई करते थे। क्षेत्र के कई महाविद्यालय विश्वविद्यालय से संबद्ध थे और परिसर में विद्यार्थियों की अच्छी-खासी भागीदारी रहती थी। उनका दावा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद स्थानीय विद्यार्थियों की भागीदारी और आम लोगों का भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हुआ है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रवेश आंकड़ा साझा नहीं किया। इस विषय पर वास्तविक स्थिति समझने के लिए विश्वविद्यालय के प्रवेश संबंधी आंकड़ों और क्षेत्रवार विद्यार्थियों की संख्या का अध्ययन जरूरी है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के आंदोलन में शामिल रहे अभिषेक

अपनी पोस्ट में अभिषेक भार्गव ने यह भी बताया कि सागर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के आंदोलन में वह खुद शामिल रहे थे। उनके अनुसार, उन्होंने तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री और प्रधानमंत्री को अपने रक्त से हजारों पोस्टकार्ड लिखे थे। विद्यार्थियों के हस्ताक्षर वाला करीब एक किलोमीटर लंबा ज्ञापन भी भेजा गया था। उन्होंने वर्ष 2009-10 में बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को प्रवेश में आरक्षण देने की मांग को लेकर आंदोलन करने का भी उल्लेख किया। भार्गव ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे, लेकिन अब इन उम्मीदों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विश्वविद्यालय की सुविधाओं और जवाबदेही पर भी सवाल

भाजपा नेता ने विश्वविद्यालय परिसर की सुविधाओं और मैदान की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने संस्थान के संचालन को लेकर सामने आए अनियमितताओं संबंधी समाचारों का जिक्र किया। हालांकि, पोस्ट में किसी विशेष जांच रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज का विवरण नहीं दिया गया है। इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

अनिल दुबे
By अनिल दुबे

लेखक के बारे में अनिल दुबे पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। डॉ सर हरीसिंह गौर केंदीय ...

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