जल सत्याग्रह के दौरान महिला की मौत से तनाव, उमंग सिंघार बोले- रीवा में नहीं लगने देंगे न्यूक्लियर प्लांट!

मध्यप्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। इस मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। रविवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि रीवा में किसी भी कीमत पर न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाने की बात भी कही।
उमंग सिंघार ने पीड़ित परिवार को दी आर्थिक सहायता
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विमला कोल के परिवार से मुलाकात कर शोक जताया। उन्होंने परिवार को तत्काल सहायता के रूप में एक लाख रुपये दिए। सिंघार ने कहा कि ग्रामीणों की चिंताओं और आंदोलन से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाया जाएगा। उन्होंने प्रस्तावित प्लांट का विरोध करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से भी घटना के संबंध में सवाल किए।
मौत की रिपोर्ट को लेकर अधिकारियों से सवाल
दौरे के दौरान उमंग सिंघार ने तहसीलदार ललन और नायब तहसीलदार बिंदू तिवारी से मौत की आधिकारिक रिपोर्ट शासन को भेजने में हुई देरी पर सवाल उठाए। तहसीलदार ने कथित तौर पर केवल मौखिक सूचना दिए जाने की बात स्वीकार की, जिस पर सिंघार ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन से मामले में स्पष्ट जानकारी देने और जरूरी कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि, घटना की परिस्थितियों और मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
विमला कोल की मौत कैसे हुई? प्रशासन और परिवार के दावे अलग
रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के अनुसार, विमला कोल की मौत ऊंचाई से गिरने के कारण हुई थी और वह आंदोलन में शामिल नहीं थीं। वहीं, मृतका के पति जमुना कोल और ग्रामीणों ने इस दावे को खारिज किया है। परिजनों का कहना है कि जल सत्याग्रह में शामिल रहने के दौरान विमला की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। पति ने दावा किया कि उनकी पत्नी के आंदोलन में शामिल होने के फोटो और वीडियो भी मौजूद हैं। मौत के कारणों को लेकर सामने आए इन विरोधाभासी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में ग्रामीण लामबंद
प्रस्तावित टाटा पावर प्लांट की तकनीकी जांच 9 अक्टूबर को रुकवाए जाने के बाद से सरई कला और रोझौही गांव के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों की प्रमुख चिंताओं में जल, जमीन, पर्यावरण और ग्रामसभा की सहमति से जुड़े सवाल शामिल हैं।




















