Naresh Bhagoria
30 Nov 2025
इंदौर – शहर की सड़कों पर मौत को खुलेआम दावत देने वाली लापरवाही का ताज़ा नमूना यशवंत रोड चौराहे पर पकड़ में आ गया, जब यातायात पुलिस की रुटीन चेकिंग में एक मोडिफाइड और खतरनाक ई-रिक्शा ने पूरे विभाग को चौंका दिया। अक्टूबर में खरीदी गई इस ई-रिक्शा को जुगाड़ू चालक ने 7 सीटर से सीधे 15–17 सीटर में तब्दील कर दिया था, और हैरानी की बात ये कि महीनों से यह बिना नंबर प्लेट, बिना बीमा, बिना फिटनेस के सड़क पर दौड़ रही थी।
जैसे ही इस बिना नंबर की ई-रिक्शा को रोका गया, तो पहली नज़र में यह पुराने 'मैजिक' के अवैध वर्ज़न जैसी दिखाई दी। लेकिन अंदर झांकते ही नजर आया कि पीछे की पूरी सीट को काट-छांटकर ऐसा जुगाड़ किया गया है कि दोनों ओर अतिरिक्त सवारियां ठूंस-ठूंसकर बैठाई जा सकें। दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की जान का सीधा सौदा तैयार था।
ड्यूटी पर मौजूद सूबेदार सैयद काज़िम हुसैन रिज़वी ने बिना देर किए वाहन जब्त कर लिया। रिज़वी के अनुसार “बाहर से देखने में सामान्य लगी, लेकिन अंदर पूरा अवैध मोडिफिकेशन था। यह मूसाखेड़ी के देवेंद्र विश्वकर्मा की बताई गई है, और यह असल में मैजिक वैन का ई-रूप है।” सूत्रों के मुताबिक, इसी मॉडल की करीब 10 अवैध ‘लंबी’ ई-रिक्शा इंदौर की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। जहां सामान्य ई-रिक्शा 8–9.75 फीट लंबी होती हैं, वहीं यह ‘मॉन्स्टर ई-रिक्शा’ 11.7 फीट लंबी है, जो साफ दर्शाता है कि नियमों को रौंदते हुए बिना रोकटोक अवैध परिवर्तन किए गए हैं।
ई-रिक्शा को लेकर प्रशासन के दावे सिर्फ फाइलों में दम तोड़ चुके हैं। शुरुआत में 51 रूट तय किए गए थे—कभी लागू नहीं हुए। बाद में 23 रूट बनाए गए—वो भी सिर्फ कागज़ पर ही जिंदा रहे। नतीजा ई-रिक्शा पूरे शहर में बेधड़क दौड़ रही हैं, जहां मन आए वहां रुकती हैं, जहां मन आए वहीं सवारियां बैठा लेती हैं। किराया वसूली का हाल तो और भी खौफ़नाक है। जुलाई में तत्कालीन संभागायुक्त दीपक सिंह ने आदेश जारी किए थे कि 2 किमी तक अधिकतम 10 रुपए, उसके बाद प्रति किलोमीटर 5 रुपए , लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि किराया वसूली पूरी तरह गुंडाराज मोड में चल रही है। न कोई मॉनिटरिंग, न कोई जांच जैसे शहर की यातायात व्यवस्था इन अवैध वाहनों के हाथों बंधक हो गई हो।
10 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा… शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की रीढ़ तोड़ रही हैं
आरटीओ रिकार्ड में भले ही 9 हजार ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हों, लेकिन शहर की सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा दौड़ रही हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसी है जो कहीं भी अचानक ब्रेक लगा देती हैं,गलत दिशा में घुस जाती हैं, चौराहों पर जाम का मुख्य कारण बनती हैं,और कई तो सवारियों के बजाय सीधे सामान ढोने में लगी हैं।बीते महीनों में कई ई-रिक्शाएं हादसों की वजह बन चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। अब 10 दिनों में 550 से ज्यादा ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई की गई है।
जल्द तय होंगे रूट –
एडिशनल डीसीपी (पश्चिम) यातायात संतोषकुमार कौल के अनुसार—
“पिछले 10 दिनों में 550 से ज्यादा ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राजबाड़ा क्षेत्र में विशेष अभियान चल रहा है। जल्द ही इनके रूट फाइनल किए जाएंगे, ताकि ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।”