Hanuman Ji and Shani Dev Story :हनुमान जी और शनिदेव के बीच क्या है संबंध? दोनों के बीच हुई थी लड़ाई, जानें चौंकाने वाली वजह!

Follow on Google News
हनुमान जी और शनिदेव के बीच क्या है संबंध? दोनों के बीच हुई थी लड़ाई, जानें चौंकाने वाली वजह!
Hanuman Ji and Shani Dev Story

शनिवार का दिन हनुमान जी और शनिदेव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बहुत लोग इन दोनों की पूजा एक साथ करते हैं, लेकिन इनके बीच का संबंध क्या है-यह कम ही लोग जानते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव अग्नि के पुत्र हैं, जबकि हनुमान जी वायु देव के पुत्र होने के कारण पवनपुत्र कहलाते हैं। एक ओर शनिदेव न्यायप्रिय और कठोर माने जाते हैं, वहीं हनुमान जी दयालु और करुणामय स्वरूप हैं।

हनुमान जी और शनिदेव का संबंध

कथाओं में बताया गया है कि हनुमान जी और शनिदेव के बीच गहरा मित्रभाव माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी ने रावण की कैद से शनिदेव को मुक्त कराया था। इस उपकार के बदले शनिदेव ने वचन दिया कि वे हनुमान भक्तों पर अपना प्रकोप नहीं डालेंगे। इसलिए कहा जाता है कि हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष शांत होता है।

रावण की कैद से शनिदेव को छुड़ाया

त्रेतायुग में रावण ने सभी ग्रहों को बंदी बना लिया था। लंका दहन के समय जब हनुमान जी लंका पहुंचे, तो उन्होंने शनिदेव को कैद में देखा। हनुमान जी ने उन्हें मुक्त कर दिया। इस कृपा से प्रसन्न होकर शनिदेव ने कहा कि जो भी हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे उनके क्रूर प्रभाव से मुक्ति मिलेगी।

कुछ कथाओं में यह भी आता है कि सूर्यमंडल में हनुमान जी के गुरु सूर्यदेव थे और शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र हैं। इस नाते हनुमान जी और शनिदेव ‘गुरु-भाई’ भी कहलाते हैं।

हनुमान और शनिदेव का युद्ध

कई पौराणिक कथाओं में हनुमान जी और शनिदेव के बीच हुए एक युद्ध का भी वर्णन मिलता है। शनिदेव अपनी शक्ति पर अत्यधिक अहंकार रखते थे और खुद को सबसे बलवान मानते थे। एक बार वे हनुमान जी के पास पहुंचे, जब हनुमान जी रामभक्ति में मग्न थे। भक्ति में लीन होने के बावजूद शनिदेव ने उन्हें युद्ध के लिए उकसाया। पहले हनुमान जी ने शांति से मना किया, लेकिन शनिदेव के घमंड भरे व्यवहार से हनुमान जी क्रोधित हो गए।

हनुमान जी ने शनिदेव का अहंकार तोड़ा

कथाओं के अनुसार, हनुमान जी ने अपनी पूंछ में शनिदेव को लपेट लिया और उन्हें धरती पर पटकना शुरू किया। इससे शनिदेव को बहुत कष्ट हुआ। जब उनका दर्द असहनीय हो गया, तब हनुमान जी ने उन पर सरसों का तेल लगाया, जिससे उन्हें राहत मिली।

यहीं से शुरू हुई तेल चढ़ाने की परंपरा

शनिदेव की पीड़ा कम होने के बाद उन्होंने हनुमान जी को धन्यवाद दिया और वचन दिया कि वे उनके भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। इसी घटना के बाद से शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts