
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को भाजपा विधायकों ने सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को 4% आरक्षण देने के फैसले के खिलाफ जमकर हंगामा किया। भाजपा विधायकों ने आरक्षण बिल की कॉपी फाड़कर स्पीकर की ओर फेंक दी, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने मार्शलों को बुलाकर उन्हें सदन से बाहर करवा दिया। इसके अलावा, स्पीकर ने भाजपा के 18 विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही से 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया।
वेतन बढ़ाने का बिल पास
हंगामे के बीच सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 100% बढ़ोतरी का विधेयक पास कर दिया। इस विधेयक को कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने पेश किया। नए प्रावधान के तहत मुख्यमंत्री का वेतन 75 हजार से बढ़कर 1.5 लाख रुपए प्रति माह हो जाएगा। विधान परिषद के सभापति और विधानसभा अध्यक्ष का वेतन 75 हजार से बढ़कर 1.25 लाख रुपए प्रति माह हो जाएगा।
‘हनी ट्रैप’ में फंसाने की साजिश का भी आरोप
भाजपा विधायकों द्वारा किए गए हंगामे को अनुशासनहीनता करार देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश किया, जिसे विधायकों ने स्वीकार कर लिया। भाजपा के विरोध का मुख्य कारण सार्वजनिक अनुबंधों में मुस्लिमों को 4% आरक्षण दिए जाने का फैसला था। इसके अलावा, भाजपा ने सरकार पर एक मंत्री को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया और न्यायिक जांच की मांग की।
निलंबित किए गए विधायक
निलंबन का आदेश जारी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष खादर ने कहा कि यह लोकतंत्र, सत्य और न्याय का प्रतीक है और हर सदस्य को इसकी गरिमा और पवित्रता का सम्मान करना चाहिए। भाजपा के निलंबित विधायकों में प्रमुख रूप से डोड्डनगौड़ा पाटिल, सीएन अश्वथ नारायण, बीए बसवराजू, एमआर पाटिल, शरणू सलगर, यशपाल सुवर्ण, बीपी हरीश, भरत शेट्टी, मुनिरत्न और बसवराज एम. शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने कहा, “यह घटना हमें बहुत ठेस पहुंचाने वाली और पीड़ादायी है। विधानसभा की गरिमा से ऊपर कोई नहीं है, और सभी विधायकों को इसका सम्मान करना चाहिए। हमें शांतिपूर्ण और सभ्य व्यवहार करना चाहिए और इस घटना से सबक लेना चाहिए।”
बलपूर्वक बाहर निकाले गए विधायक
निलंबन आदेश के बाद भाजपा विधायकों ने सदन से बाहर जाने से मना कर दिया, जिसके बाद मार्शलों को बुलाकर उन्हें बलपूर्वक बाहर निकाला गया। इस घटना के बाद भाजपा विधायकों ने सरकार पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया और इसे अलोकतांत्रिक कदम बताया।
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