डांट से नाराज कर्मचारियों ने बना डाली ‘खच्चर कर्मचारी पार्टी’! सोशल मीडिया पर छाया KKP

भोपाल। राज्य शिक्षा केंद्र यानी RSK में इन दिनों एक अनोखे नाम वाली कर्मचारी पार्टी चर्चा में है। इसका नाम ‘खच्चर कर्मचारी पार्टी’ यानी KKP रखा गया है। यह मामला एक समीक्षा बैठक के बाद सामने आया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर तौर पर तीखी टिप्पणी की गई थी। इसके बाद कार्यालय में मौजूद एक कर्मचारी ने मजाकिया अंदाज में पार्टी का लोगो तैयार किया और उसे WhatsApp पर शेयर कर दिया। देखते ही देखते यह तस्वीर और पार्टी का नाम कर्मचारियों के बीच सोशल मीडिया पर फैल गया। फिलहाल KKP कोई आधिकारिक संगठन नहीं है।
एक टिप्पणी से शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने हाल ही में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में जिलों में BRC और APC को भ्रमण के लिए मिलने वाली राशि जारी करने से जुड़ा मामला सामने आया। राशि स्वीकृत कर जारी करने की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही थी। इसी दौरान संचालक ने पुराने अधिकारियों को लेकर नाराजगी जाहिर की। आरोप है कि उन्होंने कुछ कर्मचारियों को ‘खच्चर’ कह दिया।
ऑफिस में चर्चा के बाद आया पार्टी का आइडिया
बैठक खत्म होने के बाद अधिकारी अपने-अपने कमरों में लौटे। वहां बैठक में हुई बातचीत की चर्चा होने लगी। इसी दौरान एक अधिकारी ने अपने ऑपरेटर को पूरी बात बताई। ऑपरेटर ने इसी घटना को मजाकिया अंदाज में लेते हुए ‘खच्चर कर्मचारी पार्टी’ नाम से एक लोगो बना दिया। इसके बाद यह लोगो WhatsApp और दूसरे सोशल मीडिया माध्यमों पर शेयर होने लगा। धीरे-धीरे RSK के कई कर्मचारियों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई।
‘बोझ उठाया है, अब आवाज उठाएंगे’ बना स्लोगन
सोशल मीडिया पर घूम रहे KKP के लोगो में पार्टी का कथित एजेंडा भी लिखा गया है। इसमें कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षित कार्यस्थल और श्रम अधिकारों की बात कही गई है। इसके साथ ही ‘बोझ उठाया है, अब आवाज उठाएंगे’ जैसा स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इस नाम या लोगो को किसने आधिकारिक तौर पर तैयार किया है।
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अभी पार्टी का कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया
‘खच्चर कर्मचारी पार्टी’ फिलहाल सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नजर आ रही है। किसी कर्मचारी या अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। वहीं, इस पूरे मामले पर RSK संचालक हरजिंदर सिंह का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में यह मामला कर्मचारियों के बीच चर्चा और सोशल मीडिया की हलचल तक ही सीमित है।




















