PU Special :'नेकी की दीवार' की व्यवस्था में होगा बदलाव, एमपी के 170 आनंदम केंद्र 10-10 जिलों के क्लस्टर में होंगे

राजीव सोनी, भोपाल। राज्य आनंद संस्थान ने वंचित और अभावग्रस्त लोगों की मदद के उद्देश्य से करीब एक दशक पहले इस पहल की शुरुआत की थी। अब संसाधन और देखरेख के अभाव में निष्क्रिय पड़े केंद्रों को सामुदायिक भागीदारी मॉडल के जरिए नए कलेवर में लाने की तैयारी है।
170 आनंदम केंद्रों को नए कलेवर में लाने की तैयारी
प्रदेश के विभिन्न शहरों में राज्य आनंद संस्थान द्वारा संचालित 170 आनंदम केंद्रों को अब आनंद क्लबों को गोद देने की तैयारी है। इसके लिए 10-10 जिलों के क्लस्टर बनाए जाएंगे, ताकि सेवा-परोपकार के इन केंद्रों की व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
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करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी पहल
राज्य आनंद संस्थान ने करीब एक दशक पहले प्रदेश में वंचित और अभावग्रस्त लोगों की मदद के उद्देश्य से भारतीय समाज की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित किया था। इसके पीछे ईरान में प्रचलित 'कॉफी इन द वॉल' कॉन्सेप्ट से यह विचार अभिप्रेरित था।
संसाधनों की कमी से कई केंद्र हुए निष्क्रिय
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में नेकी की दीवार और आनंदम केंद्र संसाधन और देखरेख के अभाव में निष्क्रिय हो गए थे। खुले में होने के कारण भी ऐसी स्थिति बनी, जबकि कुछ स्थानों पर घरेलू सामान, पुस्तकें, कपड़े आदि रखे गए, लेकिन उनके वितरण की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी।
अब इनडोर कैंपस में होंगे संचालित
नई व्यवस्था के तहत आनंदम केंद्रों को पूरी तरह इनडोर कैंपस में संचालित किया जा रहा है। कुछ केंद्रों पर अभी भी ताला लगा रहता है, इसलिए इस स्थिति को सुधारने और पहल को सतत बनाने के लिए संस्थान ने सामुदायिक भागीदारी मॉडल अपनाने का फैसला किया है।
आनंद क्लब निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
संस्थान का मानना है कि आनंद क्लबों से जुड़े आनंदक, युवा, शिक्षक, समाजसेवी और वॉलंटियर्स इस काम को अधिक संवेदनशीलता से कर सकते हैं। नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने सभी जिलों के वॉलंटियर्स और एनजीओ की वर्कशॉप भी बुलाई है।
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जॉय ऑफ गिविंग कॉन्सेप्ट को मिलेगा नया कलेवर
आनंदकों द्वारा बनाए गए आनंद क्लब अब जॉय ऑफ गिविंग और मदद से आनंद की ओर यानी नेकी की दीवार जैसे कॉन्सेप्ट को नया कलेवर देंगे। नेकी की दीवार की मूल भावना यही है कि घर में रखा अतिरिक्त सामान, जैसे कपड़े, किताबें, खिलौने, बर्तन, जूते-चप्पल कोई भी व्यक्ति केंद्र पर छोड़ जाए और जरूरतमंद बिना किसी पूछताछ के उसे ले जाए। देने और लेने वाले में आनंद की अनुभूति ही आनंदम का मूल उद्देश्य है। राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य के अनुसार, नई व्यवस्था में सेवा और सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।




















