Naresh Bhagoria
9 Jan 2026
इंदौर-धार रोड पर स्थित इंदौर के पास कलारिया क्षेत्र से गुजरने वाली गंभीर नदी अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए ज़हर बनती जा रही है। नदी में लगातार गंदा और रासायनिक पानी छोड़े जाने से गांव का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत कलारिया और सरपंच इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो नदी में प्रदूषण रोकने की कोई पहल की गई और न ही हालात सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए गए।
पानी में केमिकल युक्त सफेद झाग -
ग्रामीणों के अनुसार नदी के पानी में केमिकल युक्त सफेद झाग साफ दिखाई दे रहे हैं और उससे तेज़ व असहनीय दुर्गंध उठ रही है। हालात ऐसे हैं कि मजबूरी में ग्रामीण इसी दूषित पानी का उपयोग खेती की सिंचाई, पशुओं को पिलाने और घरेलू कामों में कर रहे हैं। इसका सीधा असर लोगों की सेहत और आजीविका पर पड़ रहा है। नदी में लगातार मछलियों की मौत हो रही है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन भी बढ़ता जा रहा है।
दूषित पानी में कपड़े धोने को मजबूर -
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि वे इसी दूषित पानी में कपड़े धोने को मजबूर हैं, जिसके चलते त्वचा संक्रमण, एलर्जी और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं किसान इसी पानी से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और पशुओं की सेहत पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। जिस नदी में कभी हरियाली और जीवन था, आज वही गंभीर नदी धीरे-धीरे ज़हर में तब्दील होती जा रही है।
स्वच्छता के नाम पर टैक्स की वसूली -
इसी बीच ग्राम पंचायत की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर जनता से रसीद काटकर टैक्स की वसूली तो लगातार की जा रही है, लेकिन ज़मीन पर हालात बद से बदतर हैं। क्षेत्रीय विधायक द्वारा करीब 2 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से बनवाया गया गंभीर नदी घाट आज बदहाली का शिकार नजर आ रहा है। घाट की हालत जर्जर है, चारों ओर गंदगी फैली हुई है और साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत कलारिया घाट के रख-रखाव में पूरी तरह विफल रही है। रख-रखाव के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि श्रद्धालुओं और आम जनता से स्वच्छता शुल्क और अन्य टैक्स लगातार वसूले जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि यह पूरा तंत्र “भाई-भाई की लूट” जैसा बन गया है, जहां जनहित के बजाय निजी लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब करोड़ों रुपये की लागत से घाट का निर्माण हुआ, तो फिर उसकी हालत इतनी खराब क्यों है? नदी में छोड़े जा रहे गंदे और रासायनिक पानी पर अब तक रोक क्यों नहीं लगाई गई? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गंभीर नदी में हो रहे प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई की जाए, नदी घाट और आसपास के क्षेत्र की व्यापक सफाई कराई जाए और जर्जर ढांचे की मरम्मत हो, ताकि ग्रामीणों को इस ज़हरीले संकट से राहत मिल सके।