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रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध, बोरहोल का काम रुका; ग्रामीणों के साथ बैठक बेनतीजा

रीवा के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का ग्रामीणों ने विरोध किया। बोरहोल का काम रुकवा दिया गया और त्रिपक्षीय बैठक बेनतीजा रही। ग्रामीणों ने फर्जी NOC की जांच और परियोजना निरस्त करने की मांग की।
रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध, बोरहोल का काम रुका; ग्रामीणों के साथ बैठक बेनतीजा

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विवाद गहरा गया है। शनिवार को बोरहोल का काम शुरू कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया। इसके बाद प्रशासन, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बैठक में अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की आपत्तियां दूर करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण परियोजना निरस्त करने और कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की जांच कराने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक उनकी शिकायतों का समाधान नहीं होता, तब तक परियोजना से जुड़ा काम आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

अधिकारियों ने समझाने का किया प्रयास

विरोध के दौरान तहसीलदार बिंदु तिवारी, MPIDC के अधिकारी यू.के. तिवारी, NPCIL के वैज्ञानिक श्री जैन, थाना प्रभारी अवनीश पांडेय और टाटा के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी चिंताओं को समझने और काम शुरू कराने की कोशिश की।हालांकि ग्रामीणों ने अपनी मांगों पर सहमति नहीं दी। उनका कहना है कि परियोजना को लेकर पहले ही ग्राम सभाओं में आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। ऐसे में इन प्रस्तावों और संबंधित दस्तावेजों की जांच किए बिना आगे की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं होगा।

ग्राम सभा के प्रस्तावों का हवाला, NOC की जांच की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर को हुई ग्राम सभाओं में प्रस्तावित परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। ग्रामीणों ने कथित फर्जी NOC के मामले की जांच कराने और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की वैधता स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि ग्राम सभा की आपत्तियों और स्थानीय लोगों की सहमति से जुड़े सवालों का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। हालांकि, NOC को फर्जी बताए जाने का आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाया गया है। इसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीण बोले- विकास चाहिए, लेकिन सुरक्षित उद्योग भी जरूरी

स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि वे क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों के विरोधी नहीं हैं लेकिन वे परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में ऐसे उद्योग स्थापित करने की मांग की, जिनसे रोजगार के अवसर मिलें और जिनके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर उन्हें गंभीर आशंकाएं न हों। सरपंच कोमल सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान होने तक काम शुरू नहीं करने देने की बात कही। उनके मुताबिक परियोजना को लेकर उठाए गए सवालों पर स्पष्ट जवाब और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

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प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच का दिया भरोसा

सिरमौर की तहसीलदार बिंदु तिवारी ने बताया कि परियोजना स्थल पर बोरहोल कार्य को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियां और चिंताएं सुनी गई हैं। उन्होंने कहा कि कथित NOC और ग्राम सभा के प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाएगा।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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