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4 या 5 सितंबर... कब है जन्माष्टमी? दूर करें तारीख का कन्फ्यूजन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी या 5 सितंबर को? ज्योतिषियों के आधार पर सही तारीख बताई है। जानें जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त, निशिता काल, अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग और व्रत पारण का समय। इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव किस दिन मनाया जाएगा, जानिए पूरी जानकारी यहां।
4 या 5 सितंबर... कब है जन्माष्टमी? दूर करें तारीख का कन्फ्यूजन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

हर साल भाद्रपद यानी भादो माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है। कुछ लोग 4 सितंबर तो कुछ 5 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने की बात कह रहे हैं। ज्योतिषियों के आधार पर इसकी सही तारीख बताई है।

4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी

ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार भादो कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 11:57 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक रहेगी। जन्माष्टमी का पर्व भादो कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के संयोग में मनाया जाता है। इस वजह से इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को ही मनाई जाएगी। इसी रात भक्त भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाने, तिलक लगाने और आरती करने की परंपरा है।

जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी के दिन दोपहर में पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए रात का निशिता काल सबसे खास माना जाता है। इस बार निशिता काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी दौरान भक्त भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त - 04:30 ए एम से 05:15 ए एम

प्रातः सन्ध्या - 04:52 ए एम से 06:00 ए एम

अभिजित मुहूर्त - 11:55 ए एम से 12:45 पी एम

विजय मुहूर्त - 02:26 पी एम से 03:17 पी एम

गोधूलि मुहूर्त - 06:39 पी एम से 07:02 पी एम

सायाह्न सन्ध्या - 06:39 पी एम से 07:48 पी एम

अमृत काल - 08:03 पी एम से 09:33 पी एम

निशिता मुहूर्त - 11:57 पी एम से 12:43 ए एम, सितम्बर 05

Religious

अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग

इस बार जन्माष्टमी को खास बनाने वाला एक प्रमुख कारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। 4 सितंबर की मध्यरात्रि में जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, उस समय अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग था। इसलिए इस संयोग को बेहद खास माना जा रहा है।

मध्यरात्रि का क्षण - 12:20 ए एम, सितम्बर 05

चन्द्रोदय समय - 11:29 पी एम 

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 04, 2026 को 02:25 ए एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त - सितम्बर 05, 2026 को 12:13 ए एम बजे

रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - सितम्बर 04, 2026 को 12:29 ए एम बजे

रोहिणी नक्षत्र समाप्त - सितम्बर 04, 2026 को 11:04 पी एम बजे

कब होगा जन्माष्टमी व्रत का पारण?

जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। ज्योतिषविद के अनुसार, रात में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरा होते ही तुरंत व्रत खोलना उचित नहीं माना जाता। भक्त 5 सितंबर की सुबह 6:05 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। रात में जन्मोत्सव के बाद फल और दूध आदि ग्रहण करने की परंपरा बताई गई है। अगले दिन भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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