Kajari Teej Vrat Katha: कजरी तीज पर क्यों पढ़ी जाती है ये कथा? जानें ब्राह्मण की कहानी से जुड़ी खास मान्यता

आज देशभर में कजरी तीज का पर्व मनाया जा रहा है। हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कजरी तीज की कथा सुनने से व्रत का महत्व बढ़ता है। यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, समर्पण और दांपत्य जीवन से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाती है।
कजरी तीज पर महिलाएं क्यों रखती हैं व्रत?
कजरी तीज के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की कामना के लिए व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया जाता है और कजरी तीज की व्रत कथा सुनी जाती है। वहीं, अविवाहित लड़कियां भी माता पार्वती से अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं।
कजरी तीज की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को ब्राह्मण की पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा। पूजा के लिए उसे सवा किलो चने का सत्तू चाहिए था। उसने अपने पति से सत्तू लाने को कहा। लेकिन ब्राह्मण के पास उस समय पैसे नहीं थे। पत्नी ने पति से कहा कि किसी भी तरह उसके लिए सत्तू लेकर आए, क्योंकि वह व्रत की पूजा पूरी करना चाहती थी।
मजबूरी में साहूकार की दुकान पहुंचा ब्राह्मण
पत्नी की बात सुनकर ब्राह्मण रात में एक साहूकार की दुकान पर पहुंच गया। दुकान उस समय खाली थी। मजबूरी में उसने वहां से चने की दाल, घी और शक्कर ली और करीब सवा किलो सत्तू तैयार कर लिया। इसी दौरान दुकान का नौकर वहां पहुंच गया। उसने ब्राह्मण को देखकर शोर मचा दिया और उसे चोर कहकर पकड़ लिया। शोर सुनकर साहूकार भी वहां पहुंच गया।
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ब्राह्मण ने बताई पूरी सच्चाई
साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली। उसके पास चोरी का सामान नहीं, बल्कि सिर्फ सत्तू मिला। ब्राह्मण ने भावुक होकर बताया कि उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा है। उसके पास पैसे नहीं थे, इसलिए वह मजबूरी में सत्तू लेने दुकान पर आया था। ब्राह्मण की बात सुनकर साहूकार को उसकी मजबूरी और नीयत पर भरोसा हो गया।
साहूकार ने ब्राह्मण को दिया सम्मान
ब्राह्मण की सच्चाई देखकर साहूकार का मन बदल गया। उसने ब्राह्मण की पत्नी को अपनी धर्म बहन मान लिया। इसके बाद साहूकार ने ब्राह्मण को सत्तू के साथ गहने, मेहंदी, लच्छा और रुपये भी दिए और सम्मान के साथ उसे घर भेज दिया।
चांद देखकर पूरा किया व्रत
उधर ब्राह्मणी अपने पति का इंतजार कर रही थी। कजरी तीज का चांद निकल आया था। ब्राह्मण सत्तू लेकर घर पहुंचा और पत्नी को पूरी बात बताई। इसके बाद ब्राह्मणी ने विधि-विधान से पूजा पूरी की और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अपना व्रत खोला।
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क्या है इस कथा की मान्यता?
मान्यता है कि कजरी तीज की व्रत कथा सुनने और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही परिवार पर आने वाले संकट दूर होने और घर में खुशहाली आने की भी मान्यता है। इसी आस्था के साथ महिलाएं कजरी तीज के दिन व्रत रखती हैं और पूजा के बाद कथा का श्रवण करती हैं।




















