
पल्लवी वाघेला, भोपाल। गरीबी के कारण सजा पूरी करने के बाद भी कैदी जेल में रह रहे थे। डालसा और समाजसेवियों ने मिलकर सैकड़ों कैदियों की मदद की। अर्थदंड भरने से 387 कैदियों को आजादी मिल चुकी है।
भोपाल सेंट्रल जेल में बंद सुनीता चोरी के अपराध में अपनी दो साल की सजा पूरी करने के बाद भी एक साल से जेल में थी। क्योंकि वह जुर्माने की राशि नहीं दे पाई थी। ऐसे में सुनीता की मदद के लिए कुछ लोग आगे आए और जुर्माने की राशि भर जाने के बाद अब वह अपने घर लौट गई है। न केवल सुनीता, बल्कि साल 2023 से 2025 तक तीन साल में ऐसे 387 कैदियों को उनका अर्थदंड भरकर रिहा कराया गया है। इन गरीब कैदियों की सहायता के लिए डालसा, समाजसेवी और एडवोकेट मिलकर प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश की जेलों में कई ऐसे गरीब कैदी बंद है जो अपनी सजा की अवधि तो पूरी कर चुके हैं, लेकिन जुर्माने की राशि नहीं भरने के कारण अतिरिक्त सजा काटते हैं। इस संयुक्त प्रयास के जरिए भोपाल जेल के ऐसे ही बंदियों का जुर्माना भर उन्हें रिहाई दिलाई गई है।
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इस दिशा में कार्यरत समाजसेवियों के मुताबिक कई मामलों में सजा के तौर पर जेल के साथ ही अर्थदंड भी दिया जाता है। वर्तमान में ऐसे कैदियों की अनुमानित संख्या 600 के करीब है, जो अर्थदंड के कारण सजा काट रहे हैं। इनमें से कुछ की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उनका 200 से 400 रुपए का जुर्माना भरने वाला कोई नहीं। वहीं, कुछ का जुर्माना एक लाख से अधिक है। यह लगातार प्रयास इसलिए जारी है, ताकि सजा पूरी होने के बाद भी केवल आर्थिक कारणों के चलते लोगों को जेल में न रहना पड़े। बता दें, इस साल 15 अप्रैल तक 42 बंदियों का कुल अर्थदंड करीब 87 हजार रुपए की राशि डालसा और अन्य के सहयोग से जमा करवाई गई है।
डालसा के तहत लीगल एड डिफेंस काउंसिल के वकीलों ने साल 2023 से अब तक 2600 से अधिक मामलों में आरोपी की ओर से फ्री में पैरवी की है। इनमें 480 ऐसे निर्धन-बेकसूर लोग थे, जो वकील के लिए पैसे न होने से सालों से जेल में थे। डालसा की विधिक सहायता के बाद उन्हें आरोपों से मुक्त किया गया। इसके अलावा इस समयावधि में 900 से अधिक आरोपियों की ओर से जमानत लगाई गई और करीब 800 को जमानत मिली भी।
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बता दें कि स्टेट गवर्नमेंट जेल वालों को 26 जनवरी और 15 अगस्त पर सर्कुलर जारी करती है। इसके तहत कैदियों का अर्थदंड माफ कर उन्हें रिलीज किया जाता है, लेकिन यह संख्या बहुत कम होती है। इसलिए डालसा के साथ कई संस्थाएं इस दिशा में प्रयासरत है। हमारी संस्था तीन साल से लगातार बंदियों के फ्री में केस लड़ने के साथ ही पैनल्टी भरकर उनकी रिहाई के लिए काम कर रही है। मिनाक्षी नारनवरे, एडवोकेट और संस्थापक नवजीवन पाथ फाउंडेशन ने बताया कि यह पहल लगातार जारी है। वहीं, सुनीत अग्रवाल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि हर व्यक्ति को विधिक सहायता मिल सके, यह प्रयास जारी है और ऐसे मामलों में समाजसेवी भी साथ आ रहे हैं।