मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) घरेलू LPG सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाने की तैयारी कर रही हैं। प्रस्ताव के मुताबिक 14.2 किलो के सिलेंडर में अब केवल 10 किलो गैस भरी जा सकती है ताकि सीमित सप्लाई को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
तेल कंपनियों का मानना है कि एक 14.2 किलो का सिलेंडर औसतन 35-40 दिन तक चलता है। ऐसे में अगर इसे घटाकर 10 किलो किया जाए, तो एक परिवार का काम करीब एक महीने तक चल सकता है। इससे बची हुई गैस को उन इलाकों में सप्लाई किया जा सकेगा, जहां किल्लत ज्यादा है।
इस प्रस्ताव के साथ ही सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती की जा सकती है। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमत करीब ₹913 और मुंबई में ₹912.50 है। अगर 10 किलो गैस दी जाती है, तो ग्राहकों को कम कीमत चुकानी होगी। पहचान के लिए ऐसे सिलेंडरों पर नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिसमें गैस की मात्रा साफ लिखी होगी।
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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण खाड़ी देशों से LPG सप्लाई प्रभावित हुई है। ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमलों के बाद उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन भी बाधित हुई है।
भारत के लिए सबसे बड़ा झटका ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ रूट के बंद होने से लगा है। यही वह प्रमुख रास्ता है, जहां से गैस के जहाज भारत पहुंचते हैं। फिलहाल भारत के 6 गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में वहां की किसी भी हलचल का सीधा असर भारत की सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है।
इस योजना को लागू करना आसान नहीं है। बॉटलिंग प्लांट्स को अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा और इसके लिए कई नियामकीय मंजूरियां भी जरूरी होंगी। अचानक बदलाव से लोगों में भ्रम और विरोध की स्थिति भी बन सकती है खासकर चुनावी माहौल में।
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने हाल ही में कहा कि LPG की सप्लाई चिंताजनक स्थिति में है और इसे बचाने के लिए कदम उठाने जरूरी हैं।