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किताब पढ़ो, सजा घटाओ!इस देश की जेलों में कैदियों को मिलता है अनोखा मौका

ब्राजील सरकार का मानना है कि अपराधियों को केवल कठोर सजा देकर समाज के लिए बेहतर नागरिक नहीं बनाया जा सकता। उन्हें शिक्षा, ज्ञान और सकारात्मक विचारों से जोड़ना भी जरूरी है।
इस देश की जेलों में कैदियों को मिलता है अनोखा मौका

दुनिया भर में जेलों को आमतौर पर सजा और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। अपराध करने वाले लोगों को जेल भेजा जाता है ताकि वे अपने किए की सजा भुगत सकें। लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां जेल को सिर्फ सजा की जगह नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र माना जाता है। यहां कैदियों को बेहतर इंसान बनाने के लिए एक अनोखी व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत कैदी जितनी ज्यादा किताबें पढ़ते हैं, उनकी सजा उतनी ही कम हो सकती है।

ब्राजील में लागू है अनोखा नियम

दक्षिण अमेरिका के देश ब्राजील ने अपनी कुछ जेलों में रीडिंग थ्रू रिडेम्प्शन यानी पढ़कर सुधार की नीति लागू की है। इस नियम के तहत कैदी जेल की लाइब्रेरी से किताबें लेकर पढ़ सकते हैं। किताब पढ़ने के बाद उन्हें उस पर एक लिखित समीक्षा या रिव्यू तैयार कर जेल प्रशासन को देना होता है। यदि समीक्षा तय मानकों पर खरी उतरती है, तो कैदी की सजा के कुछ दिन कम कर दिए जाते हैं। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ समय बिताना नहीं, बल्कि कैदियों के बौद्धिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देना है।

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सोच और व्यवहार बदलने की कोशिश

ब्राजील सरकार का मानना है कि अपराधियों को केवल कठोर सजा देकर समाज के लिए बेहतर नागरिक नहीं बनाया जा सकता। उन्हें शिक्षा, ज्ञान और सकारात्मक विचारों से जोड़ना भी जरूरी है। किताबें पढ़ने से कैदियों की सोच विकसित होती है और वे अपने जीवन, समाज तथा अपने व्यवहार को नए नजरिए से देखने लगते हैं।

इसी वजह से जेल प्रशासन कैदियों को साहित्य, इतिहास, विज्ञान और सामाजिक विषयों से जुड़ी किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। इससे उनके भीतर आत्मचिंतन की भावना पैदा होती है और भविष्य में अपराध की राह पर लौटने की संभावना कम होती है।

क्यों सफल मानी जा रही है यह पहल?

मनोवैज्ञानिकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी किताबें व्यक्ति के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालती हैं। पढ़ने की आदत मानसिक तनाव कम करती है, समझ बढ़ाती है और सकारात्मक सोच विकसित करती है। यही कारण है कि ब्राजील की यह पहल सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) का एक सफल मॉडल मानी जाती है। कई देशों ने भी इस तरह की व्यवस्थाओं में रुचि दिखाई है।

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भारत में कैदियों को मिलते हैं ये अधिकार

भारत में भले ही किताबें पढ़ने पर सजा कम करने जैसा कोई व्यापक कानून नहीं है, लेकिन कैदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई प्रावधान मौजूद हैं। जेल में बंद लोगों को भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। बीमार कैदियों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं भी दी जाती हैं।

मुफ्त कानूनी सहायता का प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यदि कोई व्यक्ति वकील का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है, तो सरकार उसकी ओर से कानूनी मदद प्रदान करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति को न्याय पाने का समान अवसर मिल सके।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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