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घर-घर की 'परेशानी' : ऊपर के मंजिल पर चढ़ना-उतरना मुश्किल, इसलिए कर्मचारी नहीं ले रहे सरकारी आवास

कई सालों से सरकारी आवास आवंटित कराने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनमें रहना शुरू नहीं किया। दरअसल ग्राउंड फ्लोर नहीं मिलने के कारण अधिकारी-कर्मचारी ऊपर के फ्लोर पर रहने नहीं जाते। अब सरकार ने 1,500 सरकारी अफसरों-कर्मचारियों के आवासों के आवंटन निरस्त करने का फैसला किया है।
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ऊपर के मंजिल पर चढ़ना-उतरना मुश्किल, इसलिए कर्मचारी नहीं ले रहे सरकारी आवास

अशोक गौतम, भोपाल। विंध्याचल में पदस्थ पीएस परमार को संपदा संचालनालय ने दो वर्ष पहले एफ टाइप का आवास आवंटित किया था। इन्होंने यह कहते हुए कब्जा नहीं लिया कि आवास की स्थिति खराब है। इस इंतजार में थे कि ग्राउंड फ्लोर का आवास उन्हें मिल जाएगा। सतपुड़ा भवन में काम करने वाले आशुतोष मिश्रा की भी इसी तरह की स्थिति है। इन्हें 1100 क्वार्टर में एच टाइप का आवास आवंटित किया गया था। आवास दूसरी मंजिल में है। इन समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने करीब 1,500 कर्मचारियों और अधिकारियों के आवास आवंटन निरस्त करना शुरू कर दिया है।

500 कर्मचारियों ने तीन साल से पजेशन नहीं लिया

इन आवासों में ज्यादातर एफ से आई टाइप के आवास हैं। इनमें लगभग 500 ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें तीन वर्ष पहले आवास आवंटित किए गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक कब्जा (पजेशन) नहीं लिया। आवास लेने के लिए 10 हजार से अधिक कर्मचारियों के आवेदन संपदा संचालनालय में पेंडिंग हैं। आवासों के पजेशन में देरी करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों की जगह अब दूसरे कर्मचारियों को आवंटित किया जा रहा है।

बड़ी वजह-सबको ग्राउंड फ्लोर पर मकान चाहिए

सूत्रों के अनुसार आवास आवंटन के बाद कई कर्मचारी और अधिकारी अलग-अलग कारण बताकर कब्जा लेने से बचते रहे। किसी ने दूसरी या तीसरी मंजिल का हवाला दिया तो किसी ने भवन की खराब स्थिति को कारण बताया। कई कर्मचारियों का कहना था कि नीचे का मकान मिलने पर ही वे शिफ्ट होंगे। वहीं कुछ अधिकारियों ने बारिश में छत से पानी टपकने और मरम्मत कार्य लंबित होने जैसी शिकायतें कीं। किसी कर्मचारी को एरिया पसंद नहीं आ रहा है। इससे सरकार को दोहरा नुकसान हो रहा है- पहला मकानों का किराया नहीं मिल रहा, दूसरे आवास आवंटन के बाद भी हर माह कर्मचारियों को हाउस रेंट देना पड़ रहा है।

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रख रखाव पर अतिरिक्त खर्च

अधिकारियों के मुताबिक खाली पड़े आवासों के कारण सरकार को रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा था। दूसरी ओर कई कर्मचारी लंबे समय से आवास की प्रतीक्षा सूची में हैं। अब निरस्त किए गए आवासों को नए पात्र कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि कई आवासों की स्थिति वास्तव में खराब है और उनमें मूलभूत सुविधाओं की कमी है। उनका तर्क है कि मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था बेहतर किए बिना कर्मचारियों पर कार्रवाई उचित नहीं है।

कर्मचारियों के प्रमुख बहाने

  • दूसरी, तीसरी मंजिल का आवास नहीं चाहिए
  • ऊपरी मंजिल पर चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती है
  • नीचे का मकान मिलने पर ही शिफ्ट होंगे
  • बारिश में छत से पानी टपकता है
  • भवनों की स्थिति खराब और मरम्मत अधूरी
  • खिड़की दरवाजे खराब हैं, टाइल्स उखड़े हैं  

क्यों हुई कार्रवाई

  • वर्षों तक खाली पड़े रहे सरकारी आवास
  • आवंटन के बाद भी नहीं लिया गया कब्जा
  • रख-रखाव पर बढ़ रहा था सरकारी खर्च
  • प्रतीक्षा सूची वाले कर्मचारियों को मकान नहीं मिलने का दबाव
  • सरकार को दोहरा नुकसान 

सरकार का अगला कदम

  • खाली आवासों का नए सिरे से आवंटन
  • भवनों की स्थिति का सर्वे
  • मरम्मत योग्य मकानों की सूची तैयार होगी
  • लंबे समय तक कब्जा नहीं लेने वालों पर सख्ती होगी

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आवास आवंटन निरस्त कर रहे हैं

सैकड़ों कर्मचारियों के आवास आवंटन को निरस्त किया गया है। यह कर्मचारी वर्षों से आवास आवंटन कराने के बाद उसमें कब्जा नहीं ले रहे थे। यह कर्मचारी अलग-अलग कारण बताकर आवास पर कब्जा लेने से बच रहे थे।

मनीषा सेंतिया, संचालक संपदा संचालनालय

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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