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हनुमान जी को भी झुकना पड़ा था इन 3 महायोद्धाओं के आगे?रामायण और लोककथाओं में मिलता है उल्लेख

हनुमान जी को अजेय माना जाता है, लेकिन रामायण और लोककथाओं में तीन ऐसे योद्धाओं का उल्लेख मिलता है जिनके सामने उन्हें अपनी शक्ति रोकनी पड़ी। जानिए मच्छिंद्रनाथ, मेघनाद और लव-कुश से जुड़ी रोचक कथाएं।
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रामायण और लोककथाओं में मिलता है उल्लेख

पवनपुत्र हनुमान को हिंदू धर्म में शक्ति, भक्ति और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। रामायण में उनके पराक्रम की ऐसी कई घटनाएं मिलती हैं, जहां उन्होंने अकेले ही असंभव लगने वाले कार्य पूरे कर दिखाए। चाहे समुद्र लांघकर लंका पहुंचना हो, अशोक वाटिका में रावण की सेना को चुनौती देना हो या फिर संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाना, हर जगह हनुमान जी की अद्भुत शक्ति दिखाई देती है। इसी वजह से उन्हें अजेय योद्धा माना जाता है। लेकिन रामायण, पुराणों और कुछ लोककथाओं में ऐसी घटनाओं का भी जिक्र मिलता है, जहां हनुमान जी ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के बजाय विनम्रता, धर्म और मर्यादा को प्राथमिकता दी। इन्हीं कथाओं में तीन ऐसे महायोद्धाओं का उल्लेख मिलता है, जिनके सामने हनुमान जी को झुकना पड़ा या फिर उन्होंने स्वयं संघर्ष से पीछे हटना उचित समझा।

मच्छिंद्रनाथ की योग शक्ति के आगे निष्फल हुआ पराक्रम

लोककथाओं के अनुसार मच्छिंद्रनाथ महान सिद्ध योगी और तपस्वी थे। कहा जाता है कि एक बार वे रामेश्वरम पहुंचे और भगवान राम की भक्ति में लीन होकर समुद्र में स्नान करने लगे। उसी दौरान हनुमान जी ने उनकी परीक्षा लेने का विचार किया। कथा के मुताबिक हनुमान जी ने तेज वर्षा का वातावरण बनाया और एक वानर का रूप धारण कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने लगे।

मच्छिंद्रनाथ ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि संकट आने से पहले ही सुरक्षा के उपाय कर लेने चाहिए। बात बढ़ने पर दोनों के बीच शक्ति प्रदर्शन की स्थिति बन गई। बताया जाता है कि मच्छिंद्रनाथ की सिद्ध योग शक्तियों के सामने हनुमान जी का बल प्रभावी नहीं हो पाया। अंत में वायुदेव के हस्तक्षेप से यह प्रसंग समाप्त हुआ। कई लोककथाओं में इसे हनुमान जी की पराजय के रूप में भी बताया जाता है, हालांकि धार्मिक ग्रंथों में इसके अलग-अलग संस्करण मिलते हैं।

मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र से रोका था हनुमान जी को

रामायण का यह प्रसंग सबसे अधिक चर्चित है। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने अशोक वाटिका में भारी उत्पात मचाया था। रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध करने के बाद पूरी लंका में हड़कंप मच गया था। इसके बाद रावण ने अपने सबसे शक्तिशाली पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता है, को हनुमान जी को पकड़ने का आदेश दिया। युद्ध के दौरान मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया।

हनुमान जी को कई दिव्य वरदान प्राप्त थे और ब्रह्मास्त्र भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। इसके बावजूद उन्होंने ब्रह्मास्त्र की मर्यादा और सम्मान बनाए रखने के लिए स्वयं को उसके प्रभाव में जाने दिया। इसी कारण मेघनाद उन्हें बंदी बनाकर रावण के दरबार तक ले जा सका। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यह हार नहीं थी, बल्कि दिव्य अस्त्र की गरिमा बनाए रखने के लिए हनुमान जी द्वारा लिया गया निर्णय था।

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लव-कुश के सामने नहीं उठाया हथियार

रामायण के उत्तरकांड में लव और कुश का प्रसंग भी बेहद रोचक माना जाता है। जब भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया, तब यज्ञ का घोड़ा विभिन्न राज्यों में भ्रमण के लिए छोड़ा गया। इसी दौरान लव और कुश ने उस घोड़े को पकड़ लिया और चुनौती स्वीकार कर ली। युद्ध में उन्होंने श्रीराम की सेना के कई बड़े योद्धाओं को परास्त कर दिया। शत्रुघ्न, लक्ष्मण और अन्य वीरों के बाद सुग्रीव और हनुमान जी भी वहां पहुंचे। कथा के अनुसार जब हनुमान जी ने दोनों बालकों का अद्भुत पराक्रम देखा तो उन्हें आश्चर्य हुआ। ध्यान लगाने पर उन्हें पता चला कि लव और कुश स्वयं भगवान श्रीराम और माता सीता के पुत्र हैं।

यह सत्य जानने के बाद हनुमान जी ने युद्ध करना उचित नहीं समझा। उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र और शक्ति का प्रयोग नहीं किया और शांत भाव से खड़े रहे। लव-कुश ने उन पर प्रहार भी किए, लेकिन हनुमान जी ने प्रतिकार नहीं किया। इस प्रसंग को भी कई लोग हनुमान जी के झुकने का उदाहरण मानते हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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