सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक पर संसद की मुहर, अब होंगे कुल 38 जज

नई दिल्ली। राज्यसभा ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढाकर 37 किए जाने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक 2026 को बुधवार को विपक्ष के बहिर्गमन के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही इस पर संसद की मुहर लग गई , चूंकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। यह विधेयक इसी वर्ष 16 मई को लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगा। विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पर करीब दो घंटे चली चर्चा का संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक न्यायपालिका में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए लाया गया है।
न्यायिक प्रक्रिया सुधार की दिशा में बड़ा कदम
विधि एवं न्याय राज्य मंत्री मेघवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चार न्यायाधीश बढ़ाए जाने से न्यायाधीशों की संख्या 37 तथा मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर यह संख्या 38 हो गई है। उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मेघवाल ने इस विधेयक को न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामलों की बढती संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढाया जाना समय की मांग थी। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि नये मामलों की संख्या निरंतर बढ रही है और इसे देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढायी जानी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट में जनवरी में थे 92,101 केस
मेघवाल ने कहा कि इस वर्ष जनवरी तक सुप्रीम कोर्ट में 92,101 मामले लंबित थे । वर्ष 2019 से 34 न्यायाधीशों की लगभग पूरी स्वीकृत संख्या के साथ काम करने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2025 में निपटाए गए 65,615 मामलों की तुलना में 75,410 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे ध्यान में रखकर ही न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जा रही है। शुरू में आठ जज थे और आज 38 हो जाएंगे। अध्यादेश इसलिए लाए क्योंकि विशेष बैंच बनाई गई जो सबसे अधिक समय से लंबित मामलों का निपटारा किया जा रहा है।
हर 10 लाख पर अब 22 जज
न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ हाई कोर्ट में महिला मुख्य न्यायाधीश हैं और जल्द ही महिला उच्चतम न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश भी बनने वाली हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार न्यायापालिका की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश में न्यायाधीशों और आबादी का अनुपात पहले प्रति दस लाख पर 16 जज था जो अब बढकर 22 जज प्रति दस लाख आबादी हो गया है। न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इसमें कमी लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट मिशन के माध्यम से भी मामलों को कम किया जा रहा है और इसके लिए सात हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
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