कानून, कूटनीति, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़ी 4 प्रतिष्ठित हस्तियां जाएंगी राज्यसभा, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया मनोनीत

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) और 80(3) के तहत चार विशिष्ट व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। इन नामांकनों में देश के जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन और केरल के समाजसेवी सी. सदानंदन मास्टर शामिल हैं। ये नियुक्तियां उन सीटों पर की गई हैं जो पूर्व में नामित सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुई थीं।

उज्ज्वल निकम: देश के सबसे चर्चित पब्लिक प्रॉसिक्यूटर

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उज्ज्वल देवराव निकम का नाम देश के सबसे प्रमुख क्रिमिनल लॉ वकीलों में लिया जाता है। वे 26/11 मुंबई आतंकी हमला, अंडरवर्ल्ड मामलों और अजमल कसाब के मुकदमे जैसे हाई-प्रोफाइल केसों में सरकारी पक्ष रख चुके हैं। हाल ही में भाजपा ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से उम्मीदवार बनाया था, हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सके। उनका अनुभव विधि और न्याय क्षेत्र में बेहद समृद्ध है।

हर्षवर्धन श्रृंगला: विदेश नीति के अनुभवी रणनीतिकार

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हर्षवर्धन श्रृंगला भारत सरकार में विदेश सचिव रह चुके हैं। वे अमेरिका, बांग्लादेश और थाईलैंड में भारत के राजदूत रह चुके हैं और विदेश नीति के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान उन्होंने चीफ कोऑर्डिनेटर के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। उनके अनुभव से राज्यसभा को विदेश नीति से जुड़ी चर्चा में विशेष लाभ मिलेगा।

डॉ. मीनाक्षी जैन: भारतीय इतिहास की विदुषी शिक्षाविद

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इतिहासकार और शिक्षाविद डॉ. मीनाक्षी जैन दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं। वे भारतीय संस्कृति और इतिहास पर अपने दृष्टिकोण और शोध के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी और विचारधारा ने भारत के ऐतिहासिक विमर्श को नया आयाम दिया है। वे इतिहास, शिक्षा और संस्कृति के मामलों में सदन में मजबूत आवाज बन सकती हैं।

सी. सदानंदन मास्टर: शिक्षा और समाजसेवा में आजीवन योगदान

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केरल से आने वाले सी. सदानंदन मास्टर एक वरिष्ठ शिक्षक और समाजसेवी हैं। वे राजनीतिक हिंसा के भी शिकार रह चुके हैं—1994 में वामपंथी हमले में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रियता नहीं छोड़ी। वे विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित वर्गों के बीच शिक्षा के प्रसार के लिए काम कर रहे हैं।

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे राज्यसभा में ऐसे 12 सदस्यों को मनोनीत करें जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो। राज्यसभा संसद का उच्च सदन है जिसमें कुल 245 सदस्य होते हैं, जिनमें से 12 राष्ट्रपति द्वारा नामांकित किए जा सकते हैं।

क्यों जरूरी हैं ऐसे नामांकन?

इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य संसद में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी को सुनिश्चित करना है ताकि देश की विधायी प्रक्रिया में विविध दृष्टिकोण और अनुभव शामिल हो सकें। कला, इतिहास, कूटनीति, विधि और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों से आने वाले लोगों की भागीदारी न केवल सदन की गुणवत्ता बढ़ाती है बल्कि व्यापक जनहित से जुड़े विषयों पर बहस को भी समृद्ध बनाती है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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