Manisha Dhanwani
12 Jan 2026
राज्यसभा में मंगलवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विस्तार से बयान दिया। उन्होंने बताया कि इस हमले के बाद भारत सरकार ने कई सख्त कदम उठाए। इनमें पाकिस्तानी राजनयिकों और नागरिकों को वापस भेजना और सबसे अहम – सिंधु जल संधि को स्थगित करना शामिल है।
एस. जयशंकर ने सिंधु जल समझौते को एक ‘असाधारण’ संधि बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश बिना अधिकार अपनी नदियों का पानी दूसरों को नहीं देता। उन्होंने बताया कि 1960 में यह समझौता पाकिस्तान के हितों को देखते हुए किया गया था, जबकि भारत के राज्यों की जरूरतों की अनदेखी की गई।
जयशंकर ने दो टूक कहा – ‘जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी। खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।’
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत पिछले एक दशक में आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रहा है। BRICS, SCO और QUAD जैसे मंचों पर आतंकवाद को लेकर भारत ने बड़ी भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा – ‘26 साल से फरार तहव्वुर राणा को भारत वापस लाने में मोदी सरकार ने सफलता पाई है और अब उस पर मुकदमा चल रहा है।’
जयशंकर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘22 अप्रैल से 16 जून तक पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुआ। ये दावा पूरी तरह गलत है।’
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेश मंत्री ने बताया कि कई देशों ने भारत से संपर्क किया था, लेकिन हमने साफ कह दिया कि ‘हम किसी भी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह लड़ाई जब रुकेगी, तब पाकिस्तान खुद डीजीएमओ के जरिए भारत से संपर्क करेगा। तब तक हम जवाब देते रहेंगे।’