छत्तीसगढ़ में आज एक खास नजारा देखने को मिला। राज्य के 120 सरेंडर कर चुके नक्सली विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे। इन लोगों में 1 करोड़ रुपये के इनामी पूर्व नक्सली रुपेश और 25 लाख रुपये के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा भी शामिल थे।
चैतू को साल 2013 में जगदलपुर में हुए झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। उसने करीब 3 महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। वहीं सतीश उर्फ रुपेश, जो सेंट्रल कमेटी का सदस्य (CCM) था, उस पर 1 करोड़ का इनाम था। उसने 210 साथियों के साथ सरेंडर किया था। आज दोनों विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे।
विधानसभा पहुंचने से पहले गुरुवार रात ये सभी सरेंडर नक्सली डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए गए थे। वहां उनका रेड कार्पेट बिछाकर और फूलों से स्वागत किया गया। सरकार ने इसे मुख्यधारा में शामिल होने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
आज सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने दो बार वॉकआउट किया।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि कितने मामले सामने आए और कितनों पर कार्रवाई हुई।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब दिया कि पिछली सरकार की तुलना में उनकी सरकार ने 10 गुना ज्यादा कार्रवाई की है और ट्रांसपोर्टरों पर सख्ती की गई है।
इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जिस समय की बात की जा रही है, तब लॉकडाउन लगा था। वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने हंगामा किया और पहला वॉकआउट किया।
विधायक संगीता सिन्हा ने 18 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति की मांग की। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि विभागीय प्रक्रिया के बिना यहां घोषणा करना उचित नहीं है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष का काम नहीं करना चाहती। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी की और दूसरी बार वॉकआउट कर दिया।
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने किसानों से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने फसल उत्पादन और खर्च के बारे में सवाल किया।
मोहले ने पूछा कि 900 किसानों को प्रदर्शनी और हाईब्रिड बीज का प्रशिक्षण दिया गया, इससे क्या लाभ हुआ?
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब दिया कि किसानों को अधिक उत्पादन कैसे मिले, इसकी ट्रेनिंग दी गई है। अगर उत्पादन बढ़ता है तो किसानों को आर्थिक फायदा होगा।
मोहले ने यह भी पूछा कि कितने किसानों को बीज दिए गए, कितने अधिकारियों ने प्रशिक्षण दिया और खाद का मूल्यांकन कौन करता है?
मंत्री ने कहा कि नीचे से चयनित किसानों को प्रशिक्षण और खाद दी जाती है। उन्होंने माना कि हर स्तर पर सही मूल्यांकन नहीं हो पाता, लेकिन सुझाव मिलने पर इसे जमीन पर लागू किया जाएगा।
120 सरेंडर नक्सलियों का विधानसभा आना सरकार के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। झीरम हमले से जुड़े चैतू और 1 करोड़ के इनामी रुपेश जैसे पूर्व नक्सलियों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और खास बना दिया। इसे सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अपनी नीति की सफलता के रूप में देख रही है।