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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित सिंधी सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने यहां अपने संबोधन में कहा कि आज सिंध की जमीन भारत का हिस्सा भले न हो, लेकिन सभ्यता के हिसाब से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। और जहां तक जमीन की बात है। कब बॉर्डर बदल जाए कौन जानता है, कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए।
ये बात 1947 की है जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ उस दौरान हजारों साल पुराना और 2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला थार रेगिस्तान भी इसकी भेंट चढ़ गया। ये बंटवारा महज रेगिस्तान की धूल भर का नहीं था। बल्कि इस बंटवारे के बाद हुए पलयान से पूरे सिंध की खुशहाली और तरक्की, विकास की राह हिंसा और गरीबी में तब्दील हो गई।
जिसका नतीजा मिडिल क्लास हिंदू सिंध छोड़कर भारत चले गए। वहीं, भारत से यहां आए मुस्लिम सिंध के मुस्लिमों को रास नहीं आए। भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान के सिंधी मुहाजिर कहने लगे। नतीजा ये हुआ कि सिंधियों और मुहाजिरों के बीच हिंसा छिड़ गई।
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में आगे रक्षा मंत्री ने कहा.. मैं यहां लाल कृष्ण आडवाणी का भी ज़िक्र करना चाहूंगा। उन्होंने अपनी एक किताब में लिखा है कि सिंधी हिंदू, खासकर उनकी पीढ़ी के लोग, अभी भी सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं। सिर्फ़ सिंध में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते थे।