खिलचीपुर की बारोल पंचायत में सरकारी कुएं के निर्माण पर विवाद, निजी जमीन पर बनवाने का आरोप
राजगढ़। जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि निजी जमीन पर कुआं बनने से आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ इच्छित गढ़पाले को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, सरपंच राजू सेन ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कुआं सरकारी जमीन पर ही बनवाया गया है और टैंकर के नाम पर कोई राशि नहीं निकाली गई।
जनसुनवाई में कलेक्टर को सौंपी शिकायत
मंगलवार को बारोल और देवाखेड़ी गांव के ग्यारसीराम तंवर, देवीलाल तंवर, सुरेश तंवर, बीरम तंवर, जगदीश मेवाड़ा, रामनारायण तंवर और विनोद प्रजापति सहित सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी योजना के तहत कुआं गांव के लोगों को पेयजल और सिंचाई की सुविधा देने के उद्देश्य से स्वीकृत किया गया था।
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निजी जमीन पर निर्माण कराने का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायती राज के नियमों के अनुसार सार्वजनिक कुएं का निर्माण सरकारी भूमि, सार्वजनिक स्थान या ग्रामसभा द्वारा चिन्हित जमीन पर होना चाहिए, ताकि गांव के सभी लोगों को इसका लाभ मिल सके। आरोप है कि सरपंच राजू सेन ने अपने पद का दुरुपयोग कर कुआं निजी खेत में बनवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अब उस कुएं पर निजी भूस्वामी का नियंत्रण है और आम लोगों को वहां जाने की अनुमति नहीं मिल रही है।
तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति की जांच की मांग
शिकायत में ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब कुआं निजी जमीन पर बना है, तो उसे सार्वजनिक उपयोग का कैसे माना जा सकता है। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति (TS) और प्रशासनिक स्वीकृति (AS) की भी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गरीब परिवारों की पानी की समस्या दूर करने के लिए आवंटित सरकारी राशि का इस्तेमाल एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।
जिला पंचायत सीईओ को जांच के निर्देश
जनसुनवाई में ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और जिला पंचायत सीईओ इच्छित गढ़पाले को निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले सरपंच और संबंधित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो उसकी वसूली भी की जाए।
सरपंच राजू सेन ने आरोपों को नकारा
ग्राम पंचायत बारोल के सरपंच राजू सेन ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है, सार्वजनिक पेयजल कुआं मैंने तो सरकारी भूमि में ही खुदवाया है। मैंने टैंकर के नाम पर कोई पैसा नहीं निकाला है। अब मामले में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कुएं का निर्माण किस जमीन पर हुआ और सरकारी राशि के इस्तेमाल में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।






















