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बचपन में सगाई और शादी, फिर 14 लाख की मांग! कुप्रथा ने बढ़ाई 15 साल की बच्ची की मुश्किलें

राजगढ़ के भोजपुर क्षेत्र में 15 वर्षीय बालिका के मामले ने बाल विवाह और ‘झगड़ा’ कुप्रथा पर सवाल खड़े किए हैं। परिवार के मुताबिक, तीन साल की उम्र में सगाई और 12 साल में शादी हुई। बाद में कथित तौर पर 14 लाख रुपये की मांग और फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस में शिकायत के बाद मामला दर्ज हुआ।
बचपन में सगाई और शादी, फिर 14 लाख की मांग! कुप्रथा ने बढ़ाई 15 साल की बच्ची की मुश्किलें
बाल विवाह और ‘झगड़ा’ कुप्रथा की दोहरी मार

खिलचीपुर। भोजपुर थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला सिर्फ बाल विवाह की समस्या नहीं दिखाता, बल्कि एक ऐसी सामाजिक कुप्रथा की ओर भी इशारा करता है, जिसका असर आज एक 15 वर्षीय बालिका और उसके परिवार पर पड़ रहा है।

जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में इस बालिका का जीवन सामाजिक दबाव और पुरानी परंपराओं के बीच उलझ गया।

3 साल की उम्र में हुई सगाई

परिवार के मुताबिक, बालिका की महज तीन साल की उम्र में सगाई कर दी गई थी। इसके बाद 12 साल की उम्र में उसका विवाह करा दिया गया। परिवार का दावा है कि विवाह चोरी-छिपे कराया गया था, क्योंकि उन्हें पता था कि बाल विवाह कानून के तहत अपराध है। इसके बावजूद सामाजिक दबाव और रिश्ता टूटने के डर के चलते परिवार इस फैसले के लिए तैयार हो गया।

शादी के बाद ‘झगड़ा’ कुप्रथा ने बढ़ाई परेशानी

परिवार के अनुसार, शादी के बाद क्षेत्र में चली आ रही कथित ‘झगड़ा’ कुप्रथा के चलते उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। परिवार का आरोप है कि शुरुआत में उनसे 5 लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में यह रकम कथित तौर पर बढ़कर 14 लाख रुपये तक पहुंच गई। परिवार का कहना है कि मामला केवल पैसों की मांग तक सीमित नहीं रहा।

फसलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

परिवार ने आरोप लगाया कि पिछले साल से गांव में उनकी गेहूं, सोयाबीन, मक्का और सरसों जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाया गया। परिवार के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं करीब 25 बार हुईं। परिवार का यह भी आरोप है कि उन्हें शिकायत करने या आगे कार्रवाई करने पर और नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।

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डर के बीच पुलिस तक पहुंचा परिवार

लगातार दबाव और कथित नुकसान के बाद परिवार ने दो बार पुलिस में शिकायत की। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस की ओर से कार्रवाई भी की गई, लेकिन परिवार का कहना है कि घटनाओं के बाद उनके मन में बना डर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल: बच्ची का भविष्य

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल उस 15 वर्षीय बालिका के भविष्य को लेकर है। जब उसकी सगाई हुई थी, तब वह केवल तीन साल की थी और विवाह के समय उसकी उम्र महज 12 साल थी।

आज वह 15 वर्ष की है। सवाल यह है कि जिस फैसले को समझने या अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने की उम्र भी उसकी नहीं थी, उसकी कीमत उसे क्यों चुकानी पड़े?

बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य पर गहरा असर डाल सकता है। बचपन में लिया गया फैसला कई बार बच्चों के जीवन पर लंबे समय तक प्रभाव छोड़ता है।

‘बच्ची के हिस्से में डर नहीं, सपने होने चाहिए’

इस मामले ने बाल विवाह के साथ-साथ सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता की जरूरत को भी सामने ला दिया है। उस 15 वर्षीय बालिका के हिस्से में डर और सामाजिक दबाव नहीं, बल्कि शिक्षा, सम्मान और अपने भविष्य के सपने होने चाहिए। उसके बचपन में लिए गए फैसले की जगह उसके आने वाले कल को महत्व मिलना जरूरी है।

कुप्रथाओं के खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी

अहिंसा वेलफेयर सोसायटी, राजगढ़ के मनीष दांगी ने कहा कि ‘झगड़ा’ जैसी कुप्रथाओं के साथ-साथ बाल सगाई और बाल विवाह को भी पूरी तरह रोकना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही कुरीतियों से मुक्त, सुरक्षित और बेहतर राजगढ़ बनाया जा सकता है, जहां हर बच्चे को शिक्षा, सम्मान और अपने सपनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले।

Ramesh Dangi
By Ramesh Dangi

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