Race For CM : राहुल गांधी के सबसे करीबी, 2 घंटे बंद कमरे में मीटिंग, फिर क्यों CM नहीं बन पाए वेणुगोपाल?

नेशनल डेस्क। केरलम की राजनीति में लंबे मंथन और अंदरूनी खींचतान के बाद आखिरकार कांग्रेस ने गुरुवार को वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही वह राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को शुरुआत में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था और दावा किया जा रहा था कि उनके पास करीब 50 विधायकों का समर्थन है। इसके बावजूद आखिरी समय में बाजी सतीशन के पक्ष में चली गई।
जमीनी पकड़ ने सतीशन को दिलाई बढ़त
वीडी सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत जनाधार वाली छवि मानी गई। पार्टी के भीतर हुए फीडबैक और सर्वे में यह सामने आया कि कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता ज्यादा है। सतीशन ने हाईकमान को यह भी समझाया कि वेणुगोपाल संगठन महासचिव रहते हुए अपने करीबी नेताओं को टिकट और चुनावी मदद दिलाने में सफल रहे थे, इसलिए विधायकों का उनके पक्ष में होना स्वाभाविक था। इस तर्क ने कांग्रेस नेतृत्व को प्रभावित किया और धीरे-धीरे समीकरण बदलने लगे।
ये भी पढ़ें: Kerala CM: कौन हैं वी.डी. सतीशन? केरल की राजनीति में उभरता चेहरा, जानें छात्र नेता से मुख्यमंत्री तक का पूरा सफर
बगावत के डर ने बढ़ाई हाईकमान की चिंता
सतीशन ने शुरुआत से ही साफ कर दिया था कि वह वेणुगोपाल के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे और सिर्फ मुख्यमंत्री पद चाहते हैं। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगर वेणुगोपाल का नाम आगे बढ़ा तो वह उनका प्रस्ताव तक नहीं रखेंगे। कांग्रेस नेतृत्व को डर था कि अगर सतीशन नाराज हुए तो पार्टी के भीतर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। काफी कोशिशों के बावजूद जब वह नहीं माने, तब राहुल गांधी को महसूस हुआ कि मामला केवल नेतृत्व का नहीं बल्कि संगठन को एकजुट रखने का भी है।
राहुल गांधी ने दिए भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी के संकेत
जब कोई रास्ता निकलता नहीं दिखा, तब राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लंबी चर्चा की। इसके बाद राहुल गांधी ने गुरुवार सुबह वेणुगोपाल को अपने आवास बुलाकर करीब दो घंटे तक बातचीत की। उन्होंने वेणुगोपाल से कहा कि संगठन महासचिव के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी के लिए ज्यादा अहम है और भविष्य में उनके सामने बड़ी जिम्मेदारियां भी आ सकती हैं। पार्टी को एकजुट रखने के लिए त्याग की जरूरत बताते हुए राहुल गांधी ने उन्हें पीछे हटने के लिए मना लिया। आखिरकार वेणुगोपाल ने भारी मन से सतीशन के नाम पर सहमति दे दी।
ये भी पढ़ें: 33 साल के अनुभवों की कहानी: शिवराज सिंह चौहान की किताब ‘अपनापन’, पीएम मोदी संग 33 साल के अनुभवों का अनोखा संकलन
एंटनी की सलाह भी बनी अहम वजह
इस पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एके एंटनी की राय भी काफी अहम मानी गई। राहुल गांधी ने सतीशन, रमेश चेन्निथला और वेणुगोपाल के बीच बने समीकरण को समझने के लिए एंटनी से सलाह ली। एंटनी ने साफ कहा कि फैसला उस नेता के पक्ष में होना चाहिए जिसकी पकड़ जनता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत हो। उनका मानना था कि पिछले पांच वर्षों में लेफ्ट सरकार के खिलाफ सबसे आक्रामक चेहरा सतीशन ही रहे हैं और कार्यकर्ता उन्हें लड़ाकू नेता के रूप में देखते हैं। इससे हाईकमान का झुकाव और ज्यादा सतीशन की ओर हो गया।
IUML और वायनाड के समीकरण ने दिया अंतिम फायदा
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी अंदरखाने सतीशन के समर्थन में दिखाई दी। कांग्रेस के लिए IUML का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वेणुगोपाल के रिश्ते IUML नेतृत्व से उतने मजबूत नहीं माने जाते थे, जबकि सतीशन को वहां बेहतर स्वीकार्यता हासिल थी। इसके अलावा वायनाड का राजनीतिक समीकरण भी अहम रहा, जहां IUML का मजबूत प्रभाव माना जाता है। बताया जाता है कि पार्टी ऐसे नेता के पक्ष में थी जो विधानसभा की राजनीति से सीधे जुड़ा हो और इसका फायदा आखिरकार वीडी सतीशन को मिला।












