Kerala CM:कौन हैं वी.डी. सतीशन? केरल की राजनीति में उभरता चेहरा, जानें छात्र नेता से मुख्यमंत्री तक का पूरा सफर

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में लंबे समय से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। कांग्रेस ने कई दिनों की बैठकों और विचार विमर्श के बाद आखिरकार वी.डी. सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है। यह फैसला राज्य में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद आया है, जहां कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की थी। मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही थी लेकिन सतीशन के नाम पर सहमति बनी। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है, जिसमें नेतृत्व की कमान अब सतीशन के हाथों में होगी और उनसे कई बड़ी उम्मीदें जुड़ गई हैं।
तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर गहन मंथन चल रहा था। तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक कई दौर की बैठकें हुईं, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने अपने पक्ष रख रहे थे। केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे बड़े नाम भी इस दौड़ में शामिल थे लेकिन अंतिम निर्णय राहुल गांधी और केंद्रीय नेतृत्व की सलाह के बाद लिया गया। पार्टी ने माना कि संगठन को मजबूत करने और राज्य में नई ऊर्जा लाने के लिए सतीशन सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।
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कौन हैं वी.डी. सतीशन?
वी.डी. सतीशन का जन्म 1964 में कोच्चि के पास नेटूर में हुआ था। उन्होंने अपनी राजनीतिक शुरुआत छात्र राजनीति से की और केरल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाई। धीरे धीरे वे यूथ कांग्रेस और फिर मुख्यधारा की राजनीति में आगे बढ़े। पेशे से वकील रहे सतीशन ने अपनी शिक्षा कोचीन और तिरुवनंतपुरम से पूरी की और कानून की डिग्री हासिल की। उनकी पहचान एक मजबूत वक्ता और जमीन से जुड़े नेता के रूप में बनी, जिसने उन्हें पार्टी में अलग पहचान दिलाई।
विधानसभा में लगातार जीत
सतीशन ने 2001 में परावूर विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी जीत हासिल की और अपनी मजबूत पकड़ साबित की। 2026 के चुनाव में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया। सोना तस्करी मामला, कानून-व्यवस्था और एआई कैमरा विवाद जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार को लगातार घेरा, जिससे उनकी छवि एक मजबूत नेता के रूप में और भी पुख्ता हुई।
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विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री तक का सफर
2021 के चुनाव में जब कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा, तब पार्टी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया। शुरुआत में उन्हें समझौते का उम्मीदवार माना गया था लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को अवसर में बदल दिया। उन्होंने लगातार सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दे उठाए और जनता के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत की। उनके नेतृत्व में विपक्ष अधिक सक्रिय और संगठित दिखा, जिससे पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता बढ़ती गई। यही वजह रही कि अंततः उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद सतीशन ने कहा है कि यह केरल के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी। उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया और सुधार की जरूरत पर जोर दिया।











