लखीमपुर खीरी:नीट एग्जाम रद्द होने पर छात्र ने किया सुसाइड, पेपर लीक होने से तनाव में था अभ्यर्थी

लखीमपुर खीरी। छात्र परीक्षा रद्द होने से मानसिक दबाव में था। कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा देने के बावजूद पेपर कैंसिल हो गया, इसी वजह से वह निराश था। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पेपर लीक के बीच बढ़ा तनाव
नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में पेपर लीक के आरोपों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। परीक्षा निरस्त होने की खबरों से लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। कई छात्र जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी की थी, वे खुद को असमंजस और निराशा में महसूस कर रहे हैं। इस स्थिति ने मानसिक दबाव को और बढ़ा दिया है। पैरेंट्स भी अपने बच्चों की स्थिति को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
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लखीमपुर खीरी से सामने आई दुखद घटना
लखीमपुर खीरी के सदर कोतवाली क्षेत्र के गंगोत्री नगर मोहल्ले में रहने वाले छात्र की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों के अनुसार वह पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान था। परीक्षा से जुड़ी खबरों का उस पर गहरा असर पड़ा था। गुरुवार को यह दुखद घटना सामने आई, जिसके बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल फैल गया। परिवार के लोग सदमे में हैं।
पेपर कैंसिल होने से टेंशन में था छात्र
छात्र के परिजनों के मुताबिक चाचा ने बताया कि ऋतिक ने नीट परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की थी। वह अपने भविष्य को लेकर काफी गंभीर था और परीक्षा को लेकर उत्साहित भी था। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा निरस्त होने की खबरों ने उसे तोड़ दिया। वह लगातार चिंतित और उदास रहने लगा था। परिवार ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसका तनाव कम नहीं हो पा रहा था। इस घटना ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।
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पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। परिवार के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों पर बढ़ते दबाव और अस्थिरता को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में छात्रों को मानसिक सहयोग की जरूरत होती है।












