दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात कर दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा की। साथ ही विकास परियोजनाओं, तमिल समुदाय के पुनर्वास और मछुआरों से जुड़े मुद्दों पर भी अहम बातचीत हुई।
श्रीलंका पहुंचने पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का भव्य स्वागत किया गया, जहां कंडियन डांस के जरिए भारतीय मेहमान का अभिनंदन किया गया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाया। दौरे की शुरुआत से ही यह साफ हो गया कि यह सिर्फ औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि रिश्तों को और गहरा करने का प्रयास है। स्थानीय स्तर पर भी इस दौरे को लेकर उत्साह देखने को मिला। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई शुरुआती बातचीत में सहयोग के नए रास्तों पर संकेत मिले। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे को भी दिखाता है।
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कोलंबो में राष्ट्रपति सचिवालय में उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति दिसानायके से मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने साझा इतिहास, सभ्यताओं और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान भारत द्वारा चलाए जा रहे इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट और अन्य विकास योजनाओं की समीक्षा भी की गई। तूफान प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर भी बातचीत हुई। खासतौर पर भारतीय मूल के तमिल समुदाय के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने सहयोग को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
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बैठक में समुद्री सीमा से जुड़े मछुआरों के मुद्दे पर भी गंभीर चर्चा हुई, जो लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवेदनशील विषय रहा है। दोनों पक्षों ने इस समस्या का समाधान मानवीय दृष्टिकोण से निकालने पर सहमति जताई। बातचीत में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि किसी भी फैसले से मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो। साथ ही दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग बनाए रखने की बात कही गई। इस पहल से सीमा विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है।