ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इस बार उसकी सबसे बड़ी ताकत पारंपरिक नौसेना नहीं, बल्कि ‘मॉस्किटो फ्लीट’ बनकर उभरी है। छोटे लेकिन बेहद तेज और घातक हमले करने में सक्षम इन नावों ने अमेरिका समेत वैश्विक ताकतों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
‘मॉस्किटो फ्लीट’ नाम इन नावों के छोटे आकार और झुंड में हमला करने की क्षमता के कारण पड़ा है। जैसे मच्छर झुंड में हमला कर परेशान करते हैं, वैसे ही ये नावें समूह में तेजी से हमला कर दुश्मन को घेर लेती हैं। ये नावें आकार में छोटी होती हैं, लेकिन इन्हें रॉकेट लॉन्चर और मशीनगनों से लैस किया गया है। कुछ नावें 100 नॉट्स यानी लगभग 185 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, जो इन्हें दुनिया की सबसे तेज सैन्य नौकाओं में शामिल करती है।
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इस बेड़े का संचालन IRGC के हाथ में है, जो ‘हिट एंड रन’ रणनीति अपनाता है। यानी अचानक हमला करना और तुरंत गायब हो जाना। ये नावें तटीय इलाकों, छोटे बंदरगाहों और यहां तक कि गुफाओं जैसे ठिकानों से निकलकर हमला कर सकती हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
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इन नावों की सबसे बड़ी ताकत इनकी कम लागत है। एक अमेरिकी मिसाइल की कीमत इन नावों से कहीं ज्यादा होती है, जिससे दुश्मन के लिए इनका मुकाबला करना महंगा और मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी हजारों की संख्या में ऐसी नावें मौजूद हैं।
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जहां अमेरिकी युद्धपोत अपनी सुरक्षा कर सकते हैं, वहीं तेल टैंकर और कार्गो जहाज इस खतरे के सामने बेहद कमजोर हैं। इंटरनेशनल मैरीटाइम एजेंसी के अनुसार, मौजूदा तनाव के दौरान कम से कम 20 व्यापारिक जहाजों पर इन नावों द्वारा हमला किया गया है। ईरान इन नावों के जरिए समुद्री रास्तों को बाधित कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही है।