मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत मिलने वाली स्कॉलरशिप में इस साल ज्यादा देरी हो गई है। एमपी बोर्ड में 70% और CBSE में 85% अंक लाने वाले छात्रों को दी जाने वाली यह सहायता राशि 8 महीने बाद भी नहीं मिल पाई है। इसका असर सीधे इंजीनियरिंग और मेडिकल के करीब 95 हजार छात्रों पर पड़ा है जिन्हें अब अपनी जेब से भारी फीस भरनी पड़ रही है।
स्कॉलरशिप के भरोसे प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों के सामने अब गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। छात्रों का कहना है कि कॉलेज लगातार फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं और कई जगह परीक्षा में बैठने से रोकने की चेतावनी भी दी जा रही है।
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इस साल समस्या और बढ़ गई क्योंकि स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया ही करीब 6 महीने देरी से फरवरी में शुरू हुई। इस देरी के कारण पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ और अब तक भुगतान नहीं हो सका है।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा स्थिति में स्कॉलरशिप के लिए करीब ₹160 करोड़ की जरूरत है लेकिन अभी तक केवल ₹120 करोड़ का ही बजट मिला है। इसके अलावा ₹10 करोड़ से ज्यादा की राशि निकालने के लिए वित्त विभाग की अनुमति जरूरी होती है जिससे प्रक्रिया और धीमी हो जाती है।
स्कॉलरशिप में देरी के पीछे मुख्य वजह बजट आवंटन की प्रक्रिया है।
इस साल मार्च में मिले बजट से 2024-25 के छात्रों के भुगतान किए गए जबकि 2025-26 के छात्रों को अभी भी इंतजार है।
भोपाल की छात्रा सुनीता मालवीय बताती हैं कि 12वीं में 87% अंक और JEE में अच्छी रैंक के बाद उन्होंने CSE में एडमिशन लिया।
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उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि बजट के अनुसार पहले पुराने मामलों को क्लीयर किया गया है और 2025-26 के छात्रों को जल्द ही स्कॉलरशिप जारी की जाएगी।