
पल्लवी वाघेला, भोपाल। मुंबई का विशाल समुद्र मुंबई की पहचान है। फिल्म हो टीवी या रील हर जगह यह नजर आ जाता है। इसी समुद्र को करीब से देखने की चाह में भोपाल के तीन बच्चे ट्रेन में सवार हो मुंबई पहुंच गए। यही नहीं, जब बच्चों ने समुद्र देखा तो उनकी मुंबई दर्शन की इच्छा और भी प्रबल हो गई। हालांकि, भूख लगने पर जब वह खाने के लिए भटक रहे थे, तब एक स्टॉल वाले को शंका हुई और उसने स्थानीय थाने पर बच्चों की जानकारी दी। दिलचस्प यह कि बच्चों के परिवार के आने तक बच्चों की इच्छा का मान रखते हुए मुंबई पुलिस ने खुद चाइल्ड हेल्पलाइन टीम के साथ बच्चों को मुंबई दर्शन कराया। वर्तमान में बच्चे अपने परिवार के साथ भोपाल में हैं।
यह तीनों बच्चे एक ही मोहल्ले में रहते हैं और आपस में रिश्तेदार हैं। बच्चों की उम्र 10 से 12 वर्ष के बीच है। बच्चों ने बताया कि उन्हें मुंबई का समुद्र और वहां का मरीन ड्राइव देखकर घूमने का मन करता था। परिवार से जब भी कहते तो वह बहाना बना देते थे। बीते हफ्ते इनमें से एक बच्चे को परिवार, गमी में बाहर जाने के कारण दूसरे बच्चे के घर छोड़ गया। तीसरा बच्चा भी इन दोनों बच्चों के साथ टाइम स्पेंड करने की जिद कर रहने आ गया। यही रात में एक साथ तीनों बच्चों ने कुछ रील देखी और मुंबई जाने की प्लानिंग कर ली। प्लानिंग के अनुसार बच्चे, तीसरे दिन ट्रेन से मुंबई रवाना हो गए।
बच्चों ने गुल्लक से करीब दो हजार रुपए और साथ ही इनमें से एक बच्चे ने कॉलेज गोइंग बुआ की के पर्स में रखे करीब एक हजार रुपए निकाले और तीनों निकल गए। बच्चों ने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद वह टैक्सी से सीधे समुद्र देखने पहुंचे। यहां समुद्र देखने के बाद उन्होंने पूछा तो कई सारी जगह पता चली। बच्चों का मन मुंबई दर्शन के लिए मचल गया। इसके पहले वो लोग कुछ खाना चाहते थे। यहां स्टॉल पर बैठे व्यक्ति को शंका हुई और उसकी जागरूकता से बच्चों को रेस्क्यू कर लिया गया। हालांकि, बच्चों ने कहा कि वह लोग एक दिन बाद खुद भोपाल जाने निकलने वाले थे।
बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि रेस्क्यू किए जाने पर बच्चों ने खुद पुलिसकर्मियों से कहा कि अभी मम्मी-पापा को आने में तो समय लगेगा, तब तक आप हमें मुंबई घुमा दो। उनके आने के बाद वो साथ ले जाएंगे। चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम के सदस्यों ने परिवार को जानकारी दी और बच्चों को मुंबई की अहम जगहों पर घुमाया। इसके बाद परिवार के आने पर बच्चों को आवश्यक कार्यवाही कर परिवार को सौंप दिया गया।