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MP News :मध्यप्रदेश में 7,000 मिल्क कलेक्शन सेंटरों में लगेंगी ऑटोमेटिक मशीनें

मप्र के सात हजार से ज्यादा मिल्क कलेक्शन सेंटर्स पर अब ऑटोमेटिक मशीनों से दूध की क्वालिटी और वेट तय किया जाएगा। इससे मिलावट से निजात मिलेगी।
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मध्यप्रदेश में 7,000 मिल्क कलेक्शन सेंटरों में लगेंगी ऑटोमेटिक मशीनें

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में अब ऑटोमेटिक मशीन से दूध की क्वालिटी और वेट तय होगा। इसके लिए सभी लगभग सात हजार से ज्यादा मिल्क कलेक्शन सेंटर्स पर ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जा रही है। इस मशीन से जहां किसानों को उनके दूध का उचित दाम मिलेगा, वहीं उपभोक्ताओं को बिना मिलावट के दूध की गारंटी भी मिलेगी। इस मशीन के लगने से किसानों को रेट, फैट में भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

ढाई लाख किसान पहुंचाते हैं दूध

प्रदेश में सात हजार के करीब कलेक्शन सेंटर हैं, जिनके जरिए ढाई लाख किसानों के दूध का संग्रहण किया जाता है। सेंटर ऐसे स्थानों में बनाए जाते हैं जिससे दूध निकालने के ढाई घंटे के अंदर कलेक्शन और चिलिंग मशीनों में पहुंच जाए। इससे दूध की ताजगी बनी रहती है और खराब होने का डर भी नहीं रहता है। इसे प्रोसेसिंग सेंटरों अथवा डेरी प्लांटों में 24 घंटे के अंदर पहुंचाया जाता है। 

ऐसे काम करेगी मशीन 

मशीन में दूध के वजन और उसकी गुणवत्ता मापक यंत्र एक साथ होंगे। यह यंत्र मोबाइल ऐप से दूध में फैट और वजन की जानकारी मिल सकेगी। मिल्क यूनिट और फेडरेशन के सेंटर पर ऑनलाइन तत्काल दर्ज हो जाएगी। इसी ऐप के जरिए उसके रेट भी मोबाइल ऐप पर आ जाएगा, इसे किसान और कलेक्शन सेंटर के सचिव भी देख सकेंगे।

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अभी होती है ये गड़बड़ी 

वजन और फैट सहित अन्य तत्वों को मापने के लिए मैनुअल काम होता है। इससे कलेक्शन सेंटरों पर रजिस्टर में एंट्री कई बार गलत कर दी जाती है। रेट और वजन में भेदभाव की भी शिकायतें आती है। इसकी जानकारी सिर्फ कलेक्शन सेंटरों तक सीमित रहती है, अब इसकी जानकारी रियल टाइम कलेक्शन सेंटरों तक पहुंच जाएगी।

फैक्ट फाइल 

  • दूध समितियां         7000
  • मिल्क यूनियन         7 शहरों में
  • मिनी डेरी प्लांट         10 शहरों में
  • दूध प्रोसेसिंग की क्षमता   18 लाख लीटर
  • दूध उत्पादक किसान     2.50 लाख
  • प्रति दिन दूध उत्पादन    11 लाख लीटर
  • दूध की खपत           9 लाख लीटर

मशीन लगाने की बात की जा रही है, उचित दाम मिलेगा

समितियों में दूध कलेक्शन में भेदभाव होता है। भैंस का दूध ले जाते हैं तो वहां यह कहा जाता है कि इसमें पानी ज्यादा है, घी नहीं है, नाप तौल में भी दिक्कत आती है। मशीन लगाने की बात की जा रही है। इससे उचित दाम मिलेगा।

अन्नू जाट, जिला भिंड, मेहगांव

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मशीनें लगने से मिलावट से बचा जा सकेगा

दूध कलेक्शन सेंटरों पर ऑटोमेटिक दूध कलेक्शन मशीन लगाई जाएगी। इससे दूध के वजन और क्वालिटी की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी। रियल टाइम डाटा अपलोड होगा, किसान और समिति सचिव दोनों एक साथ देख सकेंगे।  किसानों के मोबाइल पर भी इसकी जानकारी मिलेगी। दूध के फैट के हिसाब से किसानों को उसका दाम मशीन तुरंत बता देगी।

डॉ.संजय गोवाणी, एमडी, एमपीसीडीएफ भोपाल

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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