
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजराइल और लेबनान के राजदूतों के बीच दूसरी बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर अब तीन हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी बताया कि वे जल्द ही इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस आने का न्योता देने की योजना बना रहे हैं।
वहीं ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर साफ कहा है कि कोई भी डील तभी की जाएगी, जब वह अमेरिका के हित में होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर कोई तय समय सीमा नहीं है और वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है, क्योंकि पारंपरिक (नॉन-न्यूक्लियर) हमलों से ही उसे पहले काफी नुकसान पहुंचाया जा चुका है।
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व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई एक ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने अमेरिकी नेवी को आदेश दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछा रहे छोटे जहाजों को बिना तबाह किए रोक दिया जाए। इस बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए वहां जाना सुरक्षित नहीं है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से भारत के 10 जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, जबकि 14 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। वहीं, ईरान द्वारा कब्जे में लिए गए दो जहाजों पर सवार 22 भारतीय क्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरकार लगातार ईरान के संपर्क में है ताकि सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी घटनाक्रम तेज हैं। ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी पर जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हमला हुआ, जहां उन पर लाल रंग फेंका गया। वहीं, अमेरिका की सीनेट में ट्रम्प की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव एक बार फिर खारिज हो गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कानून के तहत किसी भी युद्ध को 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी जरूरी होती है। ट्रंप प्रशासन को 1 मई से पहले यह मंजूरी लेनी होगी, लेकिन राजनीतिक हालात उनके लिए चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसी वजह से ट्रम्प जल्द से जल्द इस तनाव को खत्म करने की कोशिश में लगे हैं।