
पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। टीकमगढ़ जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस को अपर कलेक्टर (एडीएम) ने आठ माह से अपना निवास बना रखा है, जबकि उन्हें एक सप्ताह से अधिक समय तक यहां ठहरने की पात्रता नहीं है। शासन के नियम हैं कि दो माह से अधिक समय से ठहरने पर दस गुना किराया वसूला जाएगा। लेकिन इस मामले में जिले के सभी जिम्मेदार अधिकारी चप्पी साधे हुए हैं। कलेक्टर का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं है, पता करके ही कुछ कह पाएंगे।

राज्य शासन ने आठ माह पहले शिवप्रसाद मंडराह को संयुक्त कलेक्टर से अपर कलेक्टर बनाकर टीकमगढ़ भेजा था। मंडराह ने सरकारी आवास के स्थान पर सर्किट हाउस के कक्ष क्रमांक-4 (जमड़ार कक्ष) में निवास बना लिया। एडीएम सर्किट हाउस के कर्मचारियों की सेवाएं ले रहे हैं और खबर है कि भोजन भी यहीं करते हैं। उन्हें कक्ष छोड़ने के लिए एसडीओ पीडब्ल्यूडी और एसडीएम टीकमगढ़ ने अब तक कोई नोटिस भी नहीं दिया है।
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लोक निर्माण विभाग के 23 नवंबर 2001 के आदेश के अनुसार, मप्र विश्राम भवन/ विश्राम गृह अधिभोग नियम 2001 के तहत मप्र शासन के प्रथम श्रेणी के स्थानांन्तरण पर पदस्थ शासकीय सेवक विश्राम भवनों या विश्राम गृहों में सात दिन से अधिक नहीं ठहर सकेंगे। स्थानांतरण की स्थिति में आवास व्यवस्था होने तक विश्राम भवन/ विश्राम गृह में ठहरने पर उनसे वही आवास किराया लिया जाएगा, जो मप्र शासन द्वारा उन्हें दिया जाता है। इसकी अधिकतम अवधि दो माह रहेगी। यदि कोई अनधिकृत रूप से रहता है तो उसे अगले एक सप्ताह के लिए निर्धारित दर से दोगुनी दर पर और उसके बाद दो सप्ताह के लिए चार गुना किराया वसूल किया जाएगा। इसके बाद दस गुना राशि वसूल की जाएगी।
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आठ माह से सर्किट हाउस में डेरा डाले एडीएम के बारे में कलेक्टर विवेक श्रोती से जानकारी ली गई तो उन्होंने रविवार के दिन वॉटसऐप पर सूचना दी कि उनकी जानकारी में नहीं है, पता करके ही बता पाएंगे। वहीं एडीएम शिवप्रसाद मंडराह, एसडीएम संस्कृति और एसडीओ पीडब्ल्यूडी प्रदीप जैन से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उपलब्ध नहीं हो सके।