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PoK :पाकिस्तानी रेंजर्स का अत्याचार... प्रदर्शन कर रहे लागों पर की गोलीबारी, 11 की मौत

PoK में JAAC पर बैन के बाद माहौल गरमा गया है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल हैं। आखिर लोगों का गुस्सा क्यों फूटा, विवाद की वजह क्या है और हालात इतने खराब कैसे हुए? जानिए पूरी खबर।
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पाकिस्तानी रेंजर्स का अत्याचार... प्रदर्शन कर रहे लागों पर की गोलीबारी, 11 की मौत
रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 11 लोगों की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी राजनीतिक आवाज को दबाया जा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। इस बीच मानवाधिकार संगठनों ने भी घटनाक्रम पर चिंता जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मोर्चरी के बाहर जुटी भीड़, फिर भड़क गई हिंसा

रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलकोट में हालात तब बिगड़ गए जब JAAC समर्थक एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर इकट्ठा हुए। यहां संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था, जिसकी कुछ दिन पहले हुई गोलीबारी में मौत हो गई थी। मृतक कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई। प्रशासन ने भीड़ को हटाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और कई जगह झड़पें शुरू हो गईं।

प्रशासन का दावा और लोगों के आरोप

पूंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने बताया कि हिंसा के दौरान चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की भी मौत हुई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की थी, जिसके जवाब में कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक के अनुसार, 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालात को नियंत्रित करने के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों और JAAC समर्थकों ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मरने और घायल होने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है। कई लोगों ने सुरक्षा बलों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप भी लगाया है।

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आखिर क्यों शुरू हुआ यह आंदोलन?

PoK में चल रहे इस आंदोलन की जड़ विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया फैसला है। 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो खुद को कश्मीर से जुड़ा बताते हैं लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का कहना है कि इस फैसले से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा। उनका आरोप है कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में बाहरी प्रभाव बढ़ाया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

महंगाई, बिजली संकट और बेरोजगारी ने बढ़ाया असंतोष

आरक्षित सीटों के विवाद के अलावा लोगों की नाराजगी के पीछे कई अन्य कारण भी हैं। JAAC लंबे समय से महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और खराब प्रशासनिक व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाता रहा है। पिछले दो वर्षों में संगठन ने आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कई बड़े आंदोलन किए थे। उन प्रदर्शनों के दौरान भी कई बार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार उनकी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही।

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JAAC पर प्रतिबंध से ज्यादा बढ़ गया तनाव

9 जून को बुलाया गया प्रदर्शन केवल आरक्षित सीटों के विरोध तक सीमित नहीं था। प्रदर्शनकारी JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और संगठन के एक नेता की हत्या के खिलाफ भी विरोध जता रहे थे। बीते सप्ताह क्षेत्रीय प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। प्रशासन का कहना है कि संगठन की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन रही थीं। इस फैसले के बाद तनाव और बढ़ गया।

मानवाधिकार आयोग ने उठाए गंभीर सवाल

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने रावलकोट में हुई हिंसा और JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने कहा कि किसी राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना गंभीर सवाल खड़े करता है। HRCP ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्र के लोगों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। आयोग ने केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों से बातचीत शुरू करने तथा तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। साथ ही एक तथ्य-खोजी दल भेजने की घोषणा भी की है।

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चुनाव से पहले बढ़ी प्रशासन की सख्ती

PoK में 27 जुलाई को चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचना चाहता है। कई इलाकों में मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी गई हैं और बड़ी सभाओं पर रोक लगा दी गई है। इस बीच JAAC नेता शौकत नवाज मीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि रावलकोट में लोगों के खिलाफ "नरसंहार" किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा और लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी चिंता

PoK में बिगड़ते हालात को देखते हुए ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इन देशों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में सड़कें बंद हो सकती हैं, संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण आवाजाही में परेशानी आ सकती है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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