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होर्मुज विवाद पर ईरान को झटका,EU ने लगाए नए प्रतिबंध

होर्मुज जलमार्ग को लेकर यूरोप और ईरान के बीच तनातनी बढ़ गई है। यूरोपीय यूनियन ने ईरान के अधिकारियों और एक सैन्य इकाई पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि ईरान ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। आखिर यह विवाद क्यों बढ़ा और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ सकता है? पूरी खबर पढ़ें।
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EU ने लगाए नए प्रतिबंध

यूरोप और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। यूरोपीय संघ ने आरोप लगाया है कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डाली।

इसी आरोप के आधार पर ईयू ने ईरान के दो नागरिकों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एक नौसैनिक इकाई पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के मामले में यूरोपीय यूनियन ने पहली बार अपने विशेष प्रतिबंधात्मक अधिकारों का इस्तेमाल किया है। 

किन लोगों और संस्थाओं पर लगाए गए प्रतिबंध

यूरोपीय यूनियन की ओर से जारी प्रतिबंधों में आईआरजीसी नौसेना की होर्मोजगान प्रांतीय कमान को शामिल किया गया है। इसके अलावा मोहम्मद अकबरजादेह और हमीद हुसैनी पर भी कार्रवाई की गई है। मोहम्मद अकबरजादेह आईआरजीसी नौसेना में राजनीतिक मामलों के उप कमांडर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं हमीद हुसैनी ईरान के तेल और गैस निर्यात संघ से जुड़े प्रतिनिधि हैं। यूरोपीय संघ का आरोप है कि इन लोगों और संस्थाओं की भूमिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में रही है। यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्वतंत्र आवाजाही को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।

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पहली बार इस्तेमाल किए गए विशेष अधिकार

इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के मामले में यूरोपीय यूनियन ने पहली बार अपने विशेष प्रतिबंधात्मक अधिकारों का इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईयू इस संदेश को स्पष्ट करना चाहता है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि सदस्य देशों ने एकजुट होकर इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों और सैन्य तनावों का सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।

ईरान ने जताई कड़ी नाराजगी

यूरोपीय यूनियन की इस कार्रवाई पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने प्रतिबंधों को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया है। काजेम गरीबाबादी ने कहा कि यह फैसला पाखंड और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि तेहरान इस तरह के प्रतिबंधों को कोई महत्व नहीं देता और अपनी राष्ट्रीय नीतियों तथा क्षेत्रीय रणनीति पर आगे भी कायम रहेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए दबाव से उनकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है। उनका दावा है कि होर्मुज क्षेत्र में उनकी मौजूदगी और गतिविधियां पूरी तरह वैध हैं।

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क्यों बढ़ा था होर्मुज को लेकर विवाद

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया था जब फरवरी में क्षेत्रीय तनाव तेज हो गया। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल की ओर से हुए हमलों के बाद उसने अपने सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ कदम उठाए थे। हालांकि यूरोपीय देशों का मानना है कि किसी भी हालात में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को बाधित करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि जहाजों की आवाजाही में रुकावट पैदा करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और नियमों के खिलाफ है। काजा कलास के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से सदस्य देशों ने प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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