PoK Protest:एक तरफ सेना, दूसरी तरफ जनता... पाक सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, होगा बड़ा प्रदर्शन

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वहां के लोग लंबे समय से बिजली, महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर नाराज हैं। अब यह नाराजगी बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गई है। तमाम दबाव और कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बल उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत होता जा रहा है।
JAAC ने बुलाया मुजफ्फराबाद तक ‘लॉन्ग मार्च’
PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार, 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद तक एक बड़े लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। यह मार्च पाकिस्तान सरकार को दिए गए अल्टीमेटम की समय सीमा खत्म होने के बाद बुलाया गया है। JAAC इलाके के कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का गठबंधन है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा रखा है, इसके बावजूद लोग इसके साथ जुड़कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। JAAC की मुख्य मांगों में गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकना, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बहाल करना तथा बिजली और जरूरी सामानों की बेहतर उपलब्धता शामिल है।
कई जिलों से हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना
जानकारी के मुताबिक, इस लॉन्ग मार्च में PoK के कई इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग और अन्य जिलों से लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर बाजार बंद रहने और सड़कें जाम होने की संभावना भी जताई जा रही है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। JAAC का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर फैलाया जा सकता है। संगठन पहले ही 38 सूत्रीय मांग पत्र जारी कर चुका है, जिसमें राजनीतिक अधिकारों और बेहतर शासन व्यवस्था की मांग शामिल है।
पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए बढ़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में चल रहा आंदोलन पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। लंबे समय से चले आ रहे असंतोष के कारण वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। एक सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ज्यादा बल प्रयोग किया जाता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना बढ़ सकती है। लोगों का आरोप है कि वर्षों से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। रोजगार, महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे लगातार बढ़ते गए हैं।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से बढ़ा गुस्सा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, PoK में कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें भी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बस टर्मिनल के पास हुई गोलीबारी में कई लोगों की मौत हुई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं, पाकिस्तान प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दे रहा है।
भारत ने जताई चिंता, पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार
यह भी पढ़ें: PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत! रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के PM, बिलावल ने भी लगाई फटकार
PoK में जारी तनाव को लेकर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वहां की मौजूदा स्थिति पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही नीतियों का परिणाम है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK के लोगों को लंबे समय से उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान वहां के लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।
वाशिंगटन तक पहुंची PoK की आवाज
PoK में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की गूंज अब अमेरिका तक पहुंच गई है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में रहने वाले PoK समुदाय के लोगों ने व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और समुदाय के कई लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां रहने वाले लोगों के साथ राजनीतिक भेदभाव किया जा रहा है और सुरक्षा बलों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जा रहा है।
सेना हटाने और अधिकार देने की मांग
वाशिंगटन में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने PoK के रिहायशी इलाकों से पाकिस्तानी सैनिकों को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने के बजाय उन पर दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बेरोजगारी, खराब प्रशासन और राजनीतिक अधिकारों की कमी जैसे मुद्दे उठाए।
क्या आगे और बड़ा होगा आंदोलन?
PoK में बढ़ता विरोध अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। लोगों की मांगें अब शासन व्यवस्था, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़ गई हैं। JAAC ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। फिलहाल PoK में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाती है या फिर सख्ती जारी रखती है।











