PoK Protest :पाकिस्तान के खिलाफ हजारों लोगों का प्रदर्शन, बोले- 'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', इस्लामाबाद पर लगाए गंभीर आरोप

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) में एक बार फिर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। रावलकोट में हजारों लोग ईदगाह मैदान में जामा हुए और इस्लामाबाद के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि Pok पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और यहां के लोगों के साथ लंबे समय से आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान राशन की सप्लाई रोकने, महंगाई, बिजली के बढ़ते बिल और प्रशासनिक दबाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। यह प्रदर्शन ऐसे समय हूआ है जब पिछले कई हफ्तों से PoK के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
रावलकोट में हजारों लोग सड़क पर उतरे
रावलकोट में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कई प्रदर्शनकारी झंडे लेकर मैदान में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने कुछ इलाकों में आटा, अनाज और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित की है ताकि आंदोलन कमजोर पड़ जाए। इसी मुद्दे को लेकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
‘हमें पकिस्तान की नहीं, पाकिस्तान को हमारी जरूरत’
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को हमारी जरूरत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीजफायर लाइन के पास प्रदर्शन कर रहे लोगों पर दबाव बनाने के लिए खाने-पीने की चीजों की सप्लाई रोकने की कोशिश की जा रही है। सरदार अम्मान खान ने कहा कि हमें आपके राशन की जरूरत नहीं है। आपको हमारी जरूरत है। ऐसा समय मत आने दीजिए कि दूसरे व्यापारिक रास्ते खुल जाएं और फिर आपको लोगों से रुकने की अपील करनी पड़े।
सरकार पर लगाए आर्थिक और राजनीतिक भेदभाव के आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन सिर्फ राशन या महंगाई तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि PoK के लोगों के साथ वर्षों से आर्थिक और राजनीतिक भेदभाव किया जा रहा है। इलाके में बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं का लाभ पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों को मिलता है, जबकि स्थानीय लोगों को महंगी बिजली और सीमित सुविधाओं का सामना करना पड़ता है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी 38 मांगें हैं, जिनमें महंगाई पर नियंत्रण, बिजली पर सब्सिडी, रोजगार, बेहतर प्रशासन और राजनीतिक अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रदर्शन को दबाने के आरोप, इंटरनेट सेवा भी प्रभावित
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित की हैं ताकि विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहर तक न पहुंच सकें। वहीं मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने इस आंदोलन को सुरक्षा से जुड़ा मामला मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। सरदार अम्मान खान समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। संगठन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और आगे भी जारी रहेगा।
आर्थिक संकट से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक रूप ले चुका
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, गेहूं और आटे की कमी, बिजली के भारी बिल और रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन सरकार की कार्रवाई और मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण अब यह बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सिर्फ बेहतर जीवन और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस्लामाबाद ने पहले किए गए कई वादे पूरे नहीं किए, जिससे लोगों का भरोसा लगातार कम हुआ है। फिलहाल रावलकोट समेत PoK के कई इलाकों में हालात पर नजर रखी जा रही है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।












